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सोलह खंडों का सार

न्यायाधिकरण के अंतिम आदे एवं सोलह खण्डों का सार

खण्ड-1   न्यायाधिकरण के ये आदेश अन्तरराज्यीय जल विवाद अधिनियम- 1956 की धारा-6 के अन्तर्गत सरकारी गजट में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी माने जायेंगे ।

खण्ड-2    सरदार सरोवर बाँध स्थल पर नर्मदा के जल की उपयोगी मात्रा 75 प्रतिशत निर्भरता के आधार पर 34,537,44 मिलियन घन मीटर (28 मिलियन एकड़ फीट) ऑंकी गई है।

खण्ड-3    नर्मदा जल की 28 मिलियन एकड़ फीट की उपयोगी मात्रा में से मध्य प्रदेश 22,511,01 मिलियन घन मीटर (1825 मिलियन एकड़ फीट), गुजरात 1110132 मिलियन घन मीटर (90 मिलियन एकड़ फीट), राजस्थान 61674 मिलियन घन मीटर (050 मिलियन एकड़ फीट) एवं महाराष्ट्र 30837 मिलियन घन मीटर (025 मिलियन एकड़ फीट) जल की मात्रा को हिस्से के रूप में प्राप्त करने का हकदार होगा ।

खण्ड-4   जल उपयोगी मात्रा (28 मिलियन एकड़ फीट) की तुलना में किसी भी वर्ष में प्राप्त आधिक्य जल को जल की उपलब्ध हुई कम मात्रा को भी इसी अनुपात में बाँट लिया जाएगा जैसा कि साधारण रूप से इनके वास्तविक हिस्से के अनुसार अर्थात मध्य प्रदेश को 73 प्रतिशत, गुजरात को 36 प्रतिशत, महाराष्ट्र को 1 प्रतिशत तथा राजस्थान को 2 प्रतिशत निर्धारित किया हुआ है ।

खण्ड-5   न्यायाधिकरण के निर्णयों को प्रकाशन की तारीख से लगाकर 45 वर्ष तक की अवधि के पश्चात किसी भी समय न्यायाधिकरण के इन आदेश की समीक्षा की जा सकेगी ।

खण्ड-6   सरदार सरोवर से प्रारम्भ नवागाम नहर का पूर्ण प्रदाय स्तर में 9144 मीटर (300 फीट) निश्चित किया गया । शीर्ष नियंत्रक से सौराष्ट्र शाखा के बिन्दु तक 12,000 में एक के ढाल के साथ तथा इसके आगे राजस्थान सीमा तक 10,000 में एक का ढाल निश्चित किया गया है ।  नहर तल के ढाल को राजस्थान एवं गुजरात राज्य के परस्पर समझौते द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है ।

खण्ड-7   सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई 14021 मीटर (460 फीट) के अधिकतम जल स्तर के साथ पूर्ण जलाशय स्तर 13868 मीटर (455 फीट) निर्धारित की गई है ।

खण्ड-8   (क) नवागाम नहर व नदी तल विद्युत गृह में किसी भी दिवस में वास्तविक उत्पादित विद्युत में से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात राज्य का 57 प्रतिशत, महाराष्ट्र का 27 प्रतिशत व गुजरात का 16 प्रतिशत हिस्सा होगा ।

       (ख) नवागाम परिसर (सरदार सरोवर परियोजना) के ऊर्जा (विद्युत) भाग के पूँजीगत व्यय को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात राज्यों के मध्य क्रमश: 57 प्रतिशत, 27 प्रतिशत एवं 16 प्रतिशत के अनुपात में बांटा जाएगा ।

खण्ड-9   सरदार सरोवर के जल की आवश्यकता को मध्यप्रदेश द्वारा जल छोड़कर पूरी की जाएगी जो मध्यवर्ती आवाह के अन्तप्रर्वाह द्वारा मध्यप्रदेश के नर्मदा सागर एवं महाराष्ट्र के नीचे की आवश्यकताओं के प6चात अधिशेष जल द्वारा होगी ।  महे6वर से निर्मुक्त किए जाने वाली जल की मात्रा को 10,15,6 मिलियन घन मीटर (812 मिलियन एकड़ फीट) निकाली गई है ।  जल की निर्मुक्ति को एक समान बनाए रखने के लिए मध्य प्रदेश को प्रतिमाह 83465 मिलियन घन मीटर (0677 मिलियन एकड़ फीट) जल की मात्रा छोड़ना आवश्यक होगा ।
खण्ड-10  (क) मध्य प्रदेश को जलाशय स्तर 26213 मीटर (860 फीट) के साथ नर्मदा सागर बाँध को बनाने की जिम्मेदारी है ।  जो सरदार सरोवर बाँध के बनने से पहले या साथ-साथ की जा सकती है ।

       (ख) नर्मदा सागर बाँध के निर्माण में होने वाले व्यय को ध्यान में रखते हुए गुजरात इस व्यय का 1763 प्रतिशत मध्य प्रदेश को प्रतिवर्ष जमा करेगा ।

खण्ड-11  इन उपखण्डों में, सरदार सरोवर परियोजना से सम्बन्धित विस्थापितों की परिभाषा, अनिवार्य रूप में अधिग्रहित की जाने वाली भूमि, भू-अधिग्रहण पर मुआवजे की राशि का भुगतान एवं पुनर्वास हेतु बनाए गए प्रावधान, गुजरात राज्य द्वारा मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र राज्यों के पुनर्वास प्रावधान एवं गुजरात के भुगतान करने से सम्बन्धित दायित्व के बारे में विस्तृत निर्देश समाविष्ट किए हुए हैं ।

खण्ड-12  सरदार सरोवर परियोजना के यूनिट-1 बाँध एवं इससे संलग्न कार्यों के व्यय को सिंचाई एवं विद्युत घटकों के मध्य क्रमश: 43:9 व 561 क़े अनुपात में बांट दिया जाएगा ।

खण्ड-13  (1) सरदार सरोवर बाँध युनिट-1 एवं इससे संलग्न कार्यों के सिंचाई घटकों की लागत व्यय को गुजरात व राजस्थान राज्यों के मध्य क्रमश: 18:1 के अनुपात में बांटना होगी ।
(2) नवागाम नहर के निर्माण व नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित किए इसके अभिकल्प से सम्बन्धित व्यय को गुजरात व राजस्थान राज्यों के मध्य निम्नानुसार बांट ली जाएगी ।
(अ) न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित की गई तल ढाल में परिवर्तन होने से भूमि, खुदाई कार्य एवं अस्तर में हुए व्यय के अन्तर के मूल्य को राजस्थान राज्य द्वारा पूर्ण रूप से वहन करना होगा ।

खण्ड-14  प्राधिकरण ने इन उपखण्डों के अन्तर्गत निर्णय दिए हैं और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की स्थापना करने हेतु तथा एक पुनर्विलोकन समिति के गठन हेतु एवं नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णयों व निर्देशों को कार्यान्वित करने हेतु विस्तृत निर्देश दिए हैं ।  इस उपखण्ड के अन्तर्गत न्यायाधिकरण ने सरदार सरोवर निर्माण सलाहकार समिति की स्थापना करने के आदेश भी दिए हैं, जिससे परियोजना की यूनिट-1 बाँध के निर्माण एवं इससे सम्बद्ध कार्यों का तथा  यूनिट-3 ऊर्जा तन्त्र का प्रबोधन किया जा सके ।

       ''उपखण्ड-7 सम्बन्धित राज्यों के मध्य हुए समझौतों द्वारा इन आदेशों में निहितनिहित नहीं हुए किसी भी परिवर्तन, संशोधन, सुधार पर रोक नहीं लगाई जाएगी ।''

खण्ड-15  मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं राजस्थान राज्यों को न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत होने वाले व्यय को स्वयं वहन करना होगा ।  इसके साथ ही न्यायाधिकरण के व्यय भी सभी राज्यों को वहन करने होंगे।

खण्ड-16  पक्षकार राज्यों में जल के बंटवारे से सम्बन्धित आदेश (इसमें किसी भी वर्ष जल की अधिकता या जल की कमी की स्थिति से निपटने के लिए जल के बंटवारे सम्बन्धित प्रावधान भी शामिल हैं) सरदार सरोवर बाँध के पूर्ण जलाशय स्तर से सम्बन्धित न्यायाधिकरण द्वारा दिए आदेश एवं निर्माण में हुए व्यय एवं लाभों के हिस्सों के बांटने का निर्धारण, सरदार सरोवर परियोजना की आवश्यकताओं को बनाए रखने के लिए मध्य प्रदेश द्वारा नियमित रूप से पानी छोड़ने के सम्बन्ध में एवं नियमित जल की निर्मुक्ति हेतु गुजरात राज्य द्वारा किए जाने वाले भुगतान के सम्बन्ध में बनाए गए नियमों के साथ-साथ एक तंत्र बनाए जाने की भी आवश्यकता है, जो न्यायाधिकरण्ा के निर्णयों को क्रियान्वित कराने तथा न्यायाधिकरण के उक्त निर्णय पर सरकारी गजट में प्रकाशन की तिथ से 45 वर्षों की अवधि के पश्चात किसी भी समय उक्त नियमों की समीक्षा कर सकें ।

 

 

 
 
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