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ज़लमौसम विज्ञान तंत्र

ज़लमौसम विज्ञान तंत्र की स्थापना

 नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश एवं निर्णय की धारा XIV की उपधारा 8(3) (V) एवं (XVI) के अन्तर्गत प्रावधान है कि :

(V) प्राधिकरण स्वचलित यंत्रों से सुसज्जित प्रवाह तथा गेजिंग केन्द्रों निस्सरण, गाद एवं वाष्पीकरण तथा मापन उपकरणों को जो आदेशों के उपबंधों को कार्यन्वित करने हेतु व आवशयक रिकार्ड प्राप्त करने के लिए समय-समय पर जहाँ आवशयक  हो, सम्बन्धित राज्य सरकारों या उनमें से किसी एक या अधिक द्वारा स्थापना, रखरखाव तथा प्रचालन करवाएगा ।  यदि आवश्यक समझा गया तो प्राधिकरण, नर्मदा नदी प्रणाली के परिवर्तित जल की मात्रा को मापने के लिए मुख्य नहरों के शीर्ष (हेड) पर तथा राजस्थान के लिए नहर के ऑफटेक पर स्वीकृत प्रकार के उपकरणों को सम्बन्धित राज्य द्वारा संस्थापन प्रचालन तथा रखरखाव की अपेक्षा करेगा ।

(XVI) प्राधिकरण भारी अवक्षेपण तथा दूरसंचार प्रणालियों की रिपोटिंग सहित बाढ़ अनुमान एवं बाढ़ नियंत्रण की प्रभावी प्रणाली की स्थापना, अनुरक्षण तथा प्रचालन के लिए उपयुक्त निर्देश जारी करेगा ।  संरचना की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी संरचना के प्रभारी मुख्य अभियंता की होगी और ऐसा कोई भी निर्णय या आदेश जिससे उनकी राय में संरचना की सुरक्षा को खतरा होगा, उन पर बाध्य नहीं होगा ।  प्राधिकरण बाढ़ के दौरान जलाशयों के प्रचालन के सम्बन्ध में ऑंकड़े वार्षिक रूप से प्रकाशित करायेगा तथा पक्षकार राज्यों को उपलब्ध करायेगा ।

नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश तथा निर्णय में दिए गए प्रावधानों के मद्देनजर बाढ़ चेतावनी सिस्टम हेतु राज्य सरकारों की सहमति से नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने जलमौसम विज्ञान तंत्र स्थापित करने की पहल की है ।

प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत जलमौसम विज्ञानीय तंत्र की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अन्तर्गत वास्तविक समय के आंकड़ों के संग्रह करने तथा नदी प्रवाह के पूर्वानुमान हेतु वर्तमान मानव चालित प्रणाली को उन्नत बनाने एवं स्वचालित करने का प्रावधान है ।  इस तंत्र में नर्मदा जल ग्रहण क्षेत्र में उपयुक्त स्थानों पर मूलत: 96 जल विज्ञानीय जलमौसम विज्ञानीय केन्द्र एक केन्द्रीय कम्प्यूटर प्रणाली तथा सभी केन्द्रों को इन्दौर में स्थापित किए जाने वाले प्रस्तावित कम्प्यूटर से वास्तविक समय नेटवर्क में जोड़ने वाली अक्षुण्ण संचार प्रणाली को स्थापित किया जाना है ।  इस परियोजना का कार्यान्वयन दो चरणों में पूर्ण करने का प्रस्ताव है, जिसके प्रारम्भिक चरण में घाटी के विभिन्न स्थानों पर केवल 26 जलमौसम केन्द्र एवं एक मुख्य नियंत्रण केन्द्र स्थापित किया जाना एवं अगले चरण में शेष 70 जल मौसम केन्द्रों को तंत्र से जोड़ा जाना है ।
क़ेन्द्रीय जल आयोग द्वारा छ: प्रमाप एवं निस्सरण स्थलों का परिचालन, अनुरक्षण और ऑंकड़ों के सम्प्रेषण में और मजबूती प्रदान करना

    जलमौसम विज्ञानीय उपदल ने 15 जनवरी, 2008 को आयोजित अपनी 8वीं बैठक में प्रमाप एवं निस्सरण स्थलों का परिचालन एवं अनुरक्षण करने तथा इन स्थलों को ऑंकड़ों के संचरण में और मजबूती प्रदान करने में सम्बन्धित कार्यों को रू 295 लाख की राशि पर केन्द्रीय जल आयोग द्वारा जमाकार्य (डिपोजिट वर्क) आधार पर किए जाने के लिए प्रस्तुत किए प्रस्ताव पर दिए अनुमोदन की अनुवर्ती कार्रवाई स्वरूप केन्द्रीय जल आयोग के साथ समझौता पत्र तैयार कर लिया गया, जिसके अनुसार केन्द्रीय जल आयोग पांच वर्षों तक डिपोजिट वर्क के रूप में नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के एक उपसंभाग को क्रियाशील स्थिति में रखने तथा उसका रखरखाव करने और केन्द्रीय जल आयोग के विद्यमान चार केन्द्रों और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के दो केन्द्रों को और अधिक क्रियाशील एवं आधुनिकतम बनाए जाने से सम्बन्धित कार्य शामिल है ।  केन्द्रीय जल आयोग ने कार्य करना आरम्भ कर दिया है तथा नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण को ऑंकड़ों का संचरण करना भी आरम्भ कर दिया है ।  समझौते पत्र की शर्तों के अनुसार केन्द्रीय जल आयोग को रू 99 लाख की राशि प्रदान (निर्मुक्त) की जा चुकी है ।

 
 
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