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    इंदिरा सागर परियोजना
परियोजनाओं विशिष्टताएँ

    इंदिरा सागर परियोजना (इंसाप) मध्यप्रदेश राज्य में सरदार सरोवर बाँध के प्रतिप्रवाह (अपस्ट्र्रीम) में स्थित एक बहुउद्देशीय परियोजना है ।  इस परियोजना के अन्तर्गत मीटर ऊँचाई एवं 653 मीटर लम्बा कांक्रीट गुरूत्व बाँध निर्मित किया गया है, जिसकी उपयोगी भंडारण क्षमता 9750 किमी मिलियन घन मीटर (79 मिलियन एकड़ फीट) है । इस परियोजना के अन्तर्गत 160 क्यूमेक शीर्ष प्रवाह वाली 24865 क़िमी लम्बी एक मुख्य नहर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे 169 लाख हेक्टेयर के क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई तथा खण्डवा जिले के ग्रामीण इलाके में 74 मिलियन घनमीटर (006 मिलियन एकड़ फीट) पेयजल की आपूर्ति की जाएगी ।  बाँध से 1,000 मेगावॉट (125 मेगावॉट प्रति यूनिट क्षमता की 8 यूनिटें) स्थापित विद्युत क्षमता वाले बाँध के दाँये तट पर निर्मित उपसतही विद्युत गृह के द्वारा जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है ।  परियोजना से मध्य प्रदेश की ओंकारेश्वर एवं महेश्वर निचली परियोजनाओं द्वारा विद्युत उत्पादन के पश्चात् सरदार सरोवर परियोजना के लिऐ महेश्वर के माध्यम से 10015 मिलियन घन मीटर (812 मिलियन एकड़ फीट) जल नियंत्रित रूप में छोड़ा जाएगा ।  इस परियोजना की 1988-89 के मूल्य स्तर पर अनुमानित लागत रू 1993.67 क़रोड़ थी, जिसके लिए योजना आयोग द्वारा सितम्बर, 1989 में निवेश स्वीकृत प्रदान की गई थी ।  मध्य प्रदेश शासन ने परियोजना की संशोधित प्रशासकीय स्वीकृति रू 2167.67 क़रोड़ प्रदान की है, जिसमें परियोजना क्षेत्र के लिए किए जाने वाले पर्यावरण सुरक्षा उपायों की लागत भी शामिल है ।

16 मई, 2000 को मध्य प्रदेश सरकार एवं राष्ट्रीय जलविद्युत विकास निगम के मध्य एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अनुसार मध्य प्रदेश सरकार एवं राष्ट्रीय जलविद्युत विकास निगम ने इंदिरा सागर एवं  ओंकारेश्वर परियोजना के निर्माण कार्यों को उनके बीच बने एक संयुक्त उपक्रम के द्वारा पूर्ण कराने का निर्णय लिया।  तदानुसार इंदिरा सागर परियोजना एवं ओंकारेश्वर परियोजना के बाँध युनिट (I) एवं विद्युत गृह युनिट (II) के अन्तर्गत के कार्यों को पूर्ण कर उनका प्रबन्ध करने के लिए कम्पनी अधिनियम 1956 के अन्तर्गत नर्मदा जल विद्युत विकास निगम का गठन किया गया ।  इस संयुक्त उपक्रम में राष्ट्रीय जल विद्युत विकास निगम की बड़ी शेयर पूंजी 51 प्रतिशत रखी गई ।  नर्मदा जलविद्युत विकास निगम ने इंदिरा सागर एवं ओंकारेश्वर परियोजनाओं की यूनिट- I एवं यूनिट-III के कार्यों की नवम्बर, 2000 में अपने अधीन ले लिया था ।  मध्य प्रदेश सरकार इन दोनों परियोजनाओं के सिंचाई नहर तंत्र (यूनिट-II) के लागत तथा यूनिट-I पर सिंचाई मद को भारित होने वाली राशि का व्यय करेगी तथा यूनिट-III का संयुक्त उपक्रम नर्मदा जल विद्युत विकास निगम ने इंदिरा सागर परियोजना की यूनिट-I एवं यूनिट-III के कार्यों को अपने स्वामित्व में लेने के पश्चात् परियोजना के प्राक्कलन को पुन: संशोधित किया ।  केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा दी गई सहमति के आधार पर आर्थिक मामलों से सम्बद्ध मंत्रिमण्डल समिति ने सितम्बर, 2000 के मूल्य स्तर के आधार पर यूनिट-I एवं यूनिट-III के लिए 435557 क़रोड़ (48837 क़रोड़ के आईड़ीसी सहित) पर अपनी स्वीकृति प्रदान की ।  कुल अनुमानित व्ययों में विद्युत मद पर इंदिरा सागर परियोजना की यूनिट- I का रू 3527.54 क़रोड़ तथा यूनिट-III   रू 464.51 क़रोड़ एवं इंदिरा सागर परियोजना के लिए सिंचाई मद पर रू 363.52 क़रोड़ भारित किए गए हैं ।

वर्ष 2009 मूल्य स्तर पर, यूनिट-II के अन्तर्गत नहर कार्यों के लिए अनुमानित की गई संशोधित व्यय  राशि रू 3182.77 क़रोड़ ऑंकी गई है, जिसे केन्द्रीय जल आयोग की परार्मश समिति के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत कर दिया गया है ।  यूनिट-   (नहर के संशोधित प्राक्कलन व्ययों को अभी नियोजन आयोग द्वारा अनुमोदित किया जाना है) ।

    बाँध, उत्प्लाव एवं सम्बद्ध कार्यों की स्थिति

    बाँध स्थल पर, बाँध निर्माण एवं उससे सम्बद्ध कार्य तथा संरचनात्मक फेसिलिटी से संबंधित कार्यों को पहले ही पूरा किया जा चुका है तथा परियोजना जनवरी, 2004 में चालू कर दी गई थी ।

 

 
 
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