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कपिल धारा

कपिल धाराः नर्मदा का प्रथम भव्य जल प्रपात

     अपनी 1320 किमी क़ी लम्बी यात्रा के दौरान नर्मदा नदी करीब 900 मीटर नीचे उतरती है । इस दौरान यह सतपुड़ा और विंध्य पर्वत श्रेणियों से बने कई मनोहर भू-दृश्यों, निर्झर तथा सकरी घाटियों में से होकर गुजरती है ।  इसकी राह में अनेक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल स्थित है ।

     नर्मदा थाले के चित्रात्मक और मोहक भू-दृश्यों,में सुंदर हरे-भरे वन, मनोहर घाटियाँ, आकर्षक फूलों के तथा मुंह में पानी भर देने वाले फलों से लदे पेड़ हैं ।  ऐसे कई भव्य स्थल हैं जहाँ से नदी का प्रवाह कई फुट नीचे गिरते हुए विस्मयकारी दृश्य प्रस्तुत करता है जो दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर देता है ।  यह दृश्य वर्षा के मौसम में अति सुन्दर होता है, जब नदी अपने पूर्ण यौवन पर होती है ।  हालांकि उस समय इसका शुभ्र धवल जल रेतीले रंगों में बदल जाता है । 

     अपने उद्गम से आठ किमी क़ी दूरी पर कपिल धारा नदी पहली बार गिरते हुए ऐसी प्रतीत होती है जैसे कि स्वयं देवी नर्मदा बड़ी शालीनता से अवतरित हो रही है ।  15 मीटर की ऊँचाई से नदी एक झरने के रूप में गिरते हुए चट्टानों से टकराती है ।  सुशोभित श्वेत जल नीचे गिरता है तब दिन के विभिन्न क्षणों के दौरान बदलते रवि र6मियों के प्रभाव तथा इसके आसपास के पेड़ों की छाया तथा चांदनी तो प्रकृति प्रेमियों के लिए नयनाभिराम दृश्य प्रस्तुत करती है । 

 
 
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