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नर्मदा जल स्कीम

नर्मदा जल स्कीम (सिंचाई मंत्रालय अधिसूचना)

नई दिल्ली, 10 सितम्बर, 1980 (12 जून, 2000 तक सं शोधित )का र्यालय आदेश 770 (अ) केन्द्रीय सरकार ने अंतर्राज्यिक जल विवाद अधिनियम, 1956 (1956 का 33) की धारा-4 के अधीन जारी की गई सिंचाई तथा कृषि मंत्रालय, भारत सरकार की अधिसूचना संख्या-कार्यालय आदेश 4054, दिनांक 6 अक्टूबर, 1969 द्वारा अंतर्राज्यिक नदी, नर्मदा और उसकी नदी घाटी से सम्बद्ध जल विवाद का अधिनिर्णय करने के लिए नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था ।

उक्त न्यायाधिकरण के निर्दिष्ट विषयों के संबंध में अन्वेषण किया तथा उक्त अधिनियम की धारा-5 की उपधारा (2) के अधीन अपनी एक रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार को अग्रेषित की, जिसमें वे तथ्य वर्णित हैं, जो उसके समक्ष आए थे तथा निर्दिष्ट विषयों पर उनके विनिश्चिय भी दिए गए थे ।

उक्त विनिश्चिय पर विचार करके, केन्द्रीय सरकार तथा गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की सरकार ने उक्त अधिनियम की धारा-5 की उपधारा (3) के अधीन, उक्त न्यायाधिकरण को कतिपय विषय निर्दिष्ट किए थे और इस प्रकार निर्दिष्ट विषयों पर न्यायाधिकरण ने केन्द्रीय सरकार को उक्त उपधारा के अधीन एक और रिपोर्ट अग्रेषित की है ।

न्यायाधिकरण की अपनी आगे की रिपोर्ट में दिए गए स्पष्टीकरण एवं मार्ग-निर्देशो के अनुसार यथा संशोधित उक्त न्यायाधिकरण का विनिश्चिय केन्द्र सरकार द्वारा भारत-सरकार, कृषि तथा सिंचाई मंत्रालय (सिंचाई विभाग) की 12 दिसम्बर, 1979 की अधिसूचना संख्या कार्यालय आदेश 792 (अ) के तहत भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया था, जैसा कि उक्त अधिनियम की धारा-6 में अपेक्षित है, तदन्तर वे विनिश्चिय विवाद वाले पक्षों के लिए अन्तिम एवं बाध्यकर हो गए ।

उक्त न्यायाधिकरण के विनिश्चिय विवाद वाले पक्षों के लिए अन्तिम एवं बाध्यकर हो गए।

उक्त न्यायाधिकरण के विनिश्चिय निर्णयों एवं निर्देशो को कार्यान्वित करने के लिए एक तंत्र, नामशः नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण तथा एक पुनर्विलोकन समिति के गठन का प्रावधान है ।

अत: अधिनियम की धारा 6 (अ) के द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद् द्वारा स्कीम का निरूपण करती है तथा नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के विनिश्चिय को प्रभावी बनाने के लिए नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (जिसे आगे प्राधिकरण का जाएगा) तथा पुनर्विलोकन समिति का गठन करती है, नामशः

1-* इस स्कीम को नर्मदा जल (संशोधित) स्कीम-1990 कहा जाएगा ।
2 यह भारत के राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होगा । *
1 नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण
2 प्राधिकरण की स्थिति तथा गठन
1 नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण एक निकाय होगा, जिसका सतत् उत्तराधिकारी** तथा कॉमन सील होगी तथा उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है और वह मुकदमा भी कर सकता है ।
2*** (अ) प्राधिकरण निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, नाम श:-
* संशोधन के परिणामस्वरूप 7 दिसम्बर की अधिसूचना सं एस 3426 क़े तहत ( संशोधित अंश रखा गया (संदर्भ: पैरा 1)
* 28 अक्टूबर, 1980 को जारी शुद्धि पत्र सं एस 872 (इ) के तहत (संशोधित अंश) रखा गया । संदर्भ: पैरा 2 उप पैरा (1) (ब)
* संशोधन के परिणामस्वरूप 3 जून, 1987 को अधिसूचना सं एसअो 554 (ऌ) के तहत (संशोधित अंश) रखा गया । संदर्भ: पैरा 2 उप पैरा (2) (ख)
1 सचिव, भारत सरकार, जल संसाधन मंत्रालय - अध्यक्ष
2 सचिव, भारत सरकार, ऊर्जा मंत्रालय - सदस्य
3 सचिव, भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय - सदस्य
*4 सचिव, भारत सरकार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय - सदस्य
*4(अ) सचिव, भारत सरकार, जनजातीय मामलो से सम्बधिंत मंत्रालय - सदस्य
5 मुख्य सचिव, गुजरात सरकार - सदस्य
6 मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश सरकार - सदस्य
7 मुख्य सचिव, महाराष्ट्र सरकार - सदस्य
8 मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार - सदस्य
9 से तीन व्यक्तियों को जो मुख्य अभियंता स्तर के नीचे के न हो - सदस्य 10 केन्द्रीय सरकार** द्वारा स्वतंत्र सदस्यों के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जिनमें से एक को कार्यकारी सदस्य के रूप मे नामित किया जाएगा । - सदस्य
11(अ) क़ेन्द्रीय सरकार पर्यावरण और विस्थापित व्यक्तियों के पुरर्वास के क्षेत्र - सदस्य में अनुभव रखने वाले एक ऐसे व्यक्ति को जो भारत-सरकार के संयुक्त सचिव या राज्य सरकार के अपर सचिव के स्तर के नीचे का न हो स्वतंत्र सदस्य के रूप में नियुक्ति करेगी ।
12 **** सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग या राज्य बिजली मंडल के प्रमुख अभियंता से मुख्य अभियंता या कार्यवाहक अपर मुख्य अभियंता के स्तर के चार सदस्य
14 जिनमें एक-एक गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा । - सदस्य
2(ब) कार्यकारी सदस्य, अध्यक्ष के साधारण पर्यवेक्षण और नियंत्रण के अधीन, प्राधिकरण के प्रशासनिक कार्य का प्रभावी होगा । यथा स्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को खंड (ix) से (xv) के अधीन नियुक्त सदस्यों मे से किसी को, यदि उनकी राय में उसके सदस्य के रूप में बने रहना उपयुक्त नहीं है, हटाने या निलंबित करने का अधिकार होगा ।
2 (स) ****
2 (द) *** जब भारत के सचिव या राज्य सरकारों के मुख्य सचिव प्राधिकरण की बैठकों में उपस्थित होने में असमर्थ हो, तो वे अपने प्रतिनिधियों को भेज सकेंगे जो कि भारत सरकार के संयुक्त सचिव या राज्य के सचिव से नीचे के स्तर के न हो ।
* 12 जून, 2000 की अधिसूचना संख्या एस. ओ. 577 (इ) के अनुसार संशोधित किया गया ।
** 10 सितम्बर, 1987 की अधिसूचना संख्या एसअो 819 (इ) के अनुसार सं शोधित किया गया । संदर्भ: (पैरा 3 उपपैरा (3) (ए), मद IX से XI½
*** 7 दिसम्बर, 1990 के संशोधन सं एस. ओ. 3426 क़े तहत रखा गया । (संदर्भ: पैरा 2 उपपैरा (2) (ए), मद द्वक्त (ए) पैरा 2 (2) (डी) संशोधन के परिणामस्वरूप 3 जून, 1987 की अधिसूचना संख्या एसअो 554 क़े तहत (सं शोधित अं श) रखा गया । (संदर्भ: पैरा 2 उपपैरा (2) (ए) एवं
(ब) 10 सितम्बर, 1997 की अधिसूचना संख्या एस. ओ. 819 (इ) के तहत खंड (सी) हटा दिया गया ।
3 प्रत्येक स्वतंत्र सदस्य पूर्णकालिक सदस्य होगा और एक अवधि के लिए नियुक्त किया जाएगा, जो पाँच वर्ष से अधिक न होगी । राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त किए गए सदस्य अं शकालिक सदस्य होंगे । स्वतंत्र सदस्य अथवा अं शकालिक सदस्य, जैसी भी स्थिति हो, नियुक्ति मामले में नियुक्ति की शर्ते निर्धारित करेगा ।
4 तीन स्वतंत्र सदस्यों में से किसी का भी स्थान रिक्त होने पर केन्द्रीय सरकार ऐसे रिक्त स्थान पर अधिकारी की नियुक्ति करेगी तथा स्वतंत्र सदस्यों के अलावा चार सदस्यों में से किसी का स्थान रिक्त हुआ है, नियुक्ति की जाएगी।
3 प्राधिकरण का सचिव
प्राधिकरण एक सचिव नियुक्त करेगा, जो इंजीनियर होगा वह प्राधिकरण सदस्य नहीं होगा ।
4 **** गणपूर्ति ओर मतदान

प्राधिकरण की बैठक की गणपूर्ति (दिन-प्रतिदिन कार्यों के अतिरिक्त) आठ सदस्यों की होगी, इसमें से भाग लेने वाले चार राज्यों में से किन्हीं तीन राज्यों का कम से कम एक सदस्य उपस्थित होना चाहिए । किसी राज्य के हित को प्रभावित करने वाला कोई भी निर्णय उस राज्य के कम से कम एक सदस्य की उपस्थिति के बिना नहीं लिया जाएगा। दिन-प्रतिदिन कार्यों के संव्यवहार की गणपूर्ति पाँच सदस्यों की होगी । प्रत्येक प्र6न दिन-प्रतिदिन के कार्यों को छोड़कर प्राधिकरण की किसी बैठक के समक्ष लाया जाता है, उस बैठक में जिसके समक्ष ऐसा विषय लाया जाता है, उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से निर्णित किया जाएगा । प्राधिकरण किसी भी ऐसे कारोबार को जिसमें एक राज्य से अधिक राज्यों के हितों को प्रभावित करने वाले विषय हों, दिन-प्रतिदिन के कार्यों के रूप में विहित नहीं करेगा । अध्यक्ष की अनुपस्थिति में बैठक में निर्वाचित सदस्य बैठकों की अध्यक्षता करेगा । मतों के बराबर होने की द शा में अध्यक्ष या बैठक की अध्यक्षता करने वाले सदस्य का एक द्वितीय और निर्णायक मत होगा । पूर्वोक्त के सिवाय सदस्यों को बराबर शक्तियाँ प्राप्त होगी । ***


5 प्राधिकरण द्वारा कार्यों का निपटारा
1 उप-पैरा (2) के प्रावधानों के अन्तर्गत प्राधिकरण अपने समक्ष आए कार्यों का निपटारा परिपत्र द्वारा या बैठक आयोजित करके कर सकेगा । तथापि प्राधिकरण का कोई सदस्य यह अपेक्षा कर सकेगा कि अमुक कार्य का निपटारा परिपत्र द्वारा न करके बैठक में किया जाए ।

2 प्राधिकरण निम्नलिखित विषयों पर अपना निर्णय किसी बैठक में, जिसमें अध्यक्ष और पक्षकार राज्यों के सभी सदस्य उपस्थित हों, संकल्प द्वारा अभिलिखित करेगा ।
(क) करोबार संबंधी नियम बनाना ।
(ख) प्राधिकरण के किसी सदस्य या सचिव अथवा किसी पदाधिकारी को कार्यों का प्रत्यायोजन
(ग) प्राधिकरण के कारोबार के किसी भाग का औपचारिक या नेमी प्रकृति के कारोबार के रूप में वर्गीकरण
(घ) कोई अन्य ऐसा विषय, जिसके बारे में चारों पक्षकार राज्यों में से कोई भी राज्य यह अपेक्षा करे कि इसके बारे में निर्णय ऐसी बैठक में लिया जाए, जिसमें पक्षकार राज्यों के सभी सदस्य उपस्थित हों ।
* उक्त उल्लेखित उप पैराग्राफ 4 की अन्तिम लाइन के अन्तर्गत अतिरिक्त से प्राधिकरण के अध्यक्ष' तक के शब्द को दिनांक 3 जून, 1987 की अधिसूचना संख्या 554 (इ) द्वारा हटा दिया गया ।
** 3 जून, 1987 के सं शोधन संख्या 554 (इ) के तहत रखे गए पैराग्राफ (5) को अधिसूचना संख्या 819 (इ) के तहत दिनांक 10 सितम्बर, 1987 को हटा दिया गया ।
*** 7 दिसम्बर,1990 की अधिसूचना संख्या एस. ओ. 3426 क़े तहत (संशोधित अंश) रखा गया । (संदर्भ: पैरा 4)
किन्तु यदि किसी विशिष्ट मद का दो क्रमवर्ती बठकों में पक्षकार राज्यों में से किसी एकाधिक सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण निपटारा न किया जा सके तो उसका निपटारा पैरा-4* में किए गए प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा ।

6 सदस्यों द्वारा क्षतिपूर्ति
प्राधिकरण का कोई भी सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी, उनके द्वारा की गई कार्रवाई से हुई हानि, क्षति या नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जो कार्य उस सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी ने सद्-भावपूर्वक एवं बिना द्वेष प्राधिकारी से स्पष्ट आदेश प्राप्त करने के पश्चात किए हैं, भले ही बाद में एसी कार्रवाई अप्राधिकृत अवधारित कर दी गई हो अथवा प्राधिकरण द्वारा नियोजित प्राधिकरण के सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी के अधीन सेवारत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए उपेक्षापूर्ण एवं दोषपूर्ण कार्य करने से हुई हानि, क्षति या नुकसान के लिए वह सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी तब तक उत्तरदायी नहीं ठहराया जाएगा जब तक यह सिद्ध नहीं हो जाए कि उस सदस्य, अधिकारी या कर्मचारी ने उस व्यक्ति को नियुक्त करने उसके सौंपे गए कार्य को पर्यवेक्षक करने में समुचित सावधानी बरतने में चूक की है ।

7 प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी
प्राधिकरण समय-समय पर ऐसे और उतने अधिकारी और कर्मचारियों को नियुक्त कर सकता है जो वह ठीक समझें और उन्हें उन नियमों और विनियमों के अधीन सेवा से हटा सकता है या पदच्युत कर सकता है, जो केन्द्रीय सरकार के अधिकारियों या कर्मचारियों की नियुक्ति, हटाए जाने या पदच्युत किए जाने के संबंध में लागू होते हैं । ऐसे सभी अधिकारी और कर्मचारी एकमात्र प्राधिकरण के नियंत्रण में होंगे । ***प्राधिकरण, केन्द्रीय सरकार की पूर्व चिकित्सा प्रतिपूर्ति के संबंध में सेवा शर्तों के संचालन हेतु विनियम बना सकेगी । वेतनमान और सेवा की अन्य शर्तें वो होंगी जो केन्द्र सरकार के कर्मचारियों पर लागू होती है ।
प्राधिकरण उक्त चारों राज्यों की सेवा में नियोजित व्यक्तियों की नियुक्ति या नियोजन उस अनुपात में कर सकेगा जो वह ठीक समझे । प्राधिकरण ऐसी व्यवस्था करेगा कि वे राज्य सरकारों से नियोजित व्यक्ति प्राधिकरण के पूर्णकालिक नियोजन के लिए प्राधिकरण के किसी कार्य या सेवा को पूर्ण करने के लिए उपलब्ध हो सकें । प्राधिकरण किसी भी व्यक्ति की सीधी भर्ती कर सकेगा या केन्द्र से अथवा किसी अन्य स्त्रोत से, जो भी वह उपयुक्त समझे, ऐसे व्यक्ति की सेवाएँ प्राप्त कर सकेगा ।

8 प्रशासनिक एवं फील्ड संगठन लागत
1- ****प्राधिकरण का समस्य व्यय (जिसके अन्तर्गत स्वतंत्र सदस्यों के वेतन और व्यय भी है) मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान की राज्य सरकारें समान अनुपात में वहन करेंगी । किसी राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य को संबंधित व्यय, सम्बद्ध राज्य द्वारा वहन किए जाएँगे । केन्द्रीय सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों से संबंधित व्यय सरकार द्वारा वहन किए जाएँगे । प्रत्येक राज्य में गेजिंग और अन्य जल विज्ञानीय केन्द्रों के रखरखाव, प्रचालन और नियंत्रण का व्यय और ऑंकड़े संसूचित करने के लिए दूरसंचार प्रणालियों का व्यय सम्बद्ध राज्यों द्वारा वहन किया जाएगा ।
2- इन कार्यों को छोड़कर जिनकी लागत को दो या दो से अधिक पक्षकार राज्यों द्वारा वहन करने के संबंध में न्यायाधिकरण ने आदे श दिए हैं, भण्डारों, विद्युत संस्थानों, डायर्व शन करने, शीर्ष कार्य और नहर प्रणाली के निर्माण का व्यय पूर्णत: उसी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जिसके क्षेत्र में वह कार्य स्थित है । जहाँ जिस प्रकार पूँजी लातत बांटी जाती है, वहाँ प्रचालन और अनुरक्षण लागत भी उसी अनुपात में बांटी जाएगी ।
*20 जनवरी, 1981 को जारी शुद्धि पत्र संख्या एस. ओ. 45 (इ) के तहत (संशोधित अंश) रखा गया । (संदर्भ: पैरा 5 उप पैरा (2))
**3 जून, 1987 की अधिसूचना संख्या 554 (इ) के तहत जोड़ा गया । (संदर्भ: पैरा 5 उप पैरा 2 (5))
***22 नवम्बर, 1982 की अधिसूचना से 856 (इ) के तहत जोड़ा गया (संदर्भ: पैरा 7)
****4 मई, 1988 की अधिसूचना सं एस.ओ. 467 (इ) के अनुसार सं शोधित (संदर्भ: पैरा 8)

9- प्राधिकरण की शक्तियाँ, कार्य तथा कत्तॅव्य
1- *प्राधिकरण की भूमिका मुख्यत: सभी परियोजना के कार्यान्वयन के लिए हर प्रकार से समन्वय करना और निर्देश देना होगा । जिनके अन्तर्गत अभियांत्रिकीय, पर्यावरण संरक्षण के उपाय और (पुनर्वास कार्यक्रम भी है तथा यह भी सुनि6चित करना है कि पूर्वोक्त परियोजनाओं की स्वीकृति दिए जाने के समय केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुबन्धित निबन्धनों और शर्तों का सम्यक रूप से पालन किया गया है । *
2- प्राधिकरण को शक्तियाँ सौंपी जाएगी तथा निम्नलिखित के संबंध में न्यायाधिकरण के आदे शों के कार्यान्वयन के लिए सभी आवश्यक , पर्याप्त तथा उचित कार्य करने होंगे:
(i) नर्मदा जल का भंडारण, आवंटन, नियमन तथा नियंत्रण
(ii) सरदार सरोवर परियोजना से विद्युत लाभों का बंटवारा
(iii) मध्य प्रदे श द्वारा जल की नियमित निर्मुक्ति
(iv) सरदार सरोवर के अन्तर्गत सम्भावित जलमग्न भूमि तथा सम्पत्ति का संबंधित राज्य द्वारा सरदार परियोजना के लिए अधिग्रहण
(v) विस्थापितों को मुआवजा तथा उनका पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास
(vi) लागत का बंटवारा
2 (क़) *प्राधिकरण एक या अधिक उपसमितियों का गठन कर सकेगा और उन्हें अपने ऐसे कृत्यों को समानुदिष्ट कर सकेगा और अपनी ऐसी शक्तियों को प्रत्यायोजित कर सकेगा, जो वह ठीक से समझें । *
3 उपरोक्त कार्यों को प्राधिकरण सामान्यत: पूर्वाग्रहके बिना करते रहने के साथ-साथ निम्नलिखित कार्य भी करेगा :
1- मध्य प्रदेश अथवा गुजरात जैसी भी स्थिति हो, प्राधिकरण को सरदार सरोवर परियोजना रिपोर्ट, नर्मदा सागर परियोजना रिपोर्ट, ओंकारे6वर परियोजना रिपोर्ट तथा महे6वर परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा । प्राधिकरण संबंधित राज्यों, केन्द्रीय जल आयोग, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण तथा योजना आयोग को इन परियोजनाओं में अनुवर्ती परिवर्तन अथवा बाँधों, विद्युत गृहों और नहर के मुख्य कार्यों के संबंध में लागत में भारी वृद्धि के मामले में उपयुक्त कार्रवाई करने हेतु प्राधिकरण को सूचित किया जाएगा ।
2- प्राधिकरण निर्माण कार्यक्रमों की भिन्न-भिन्न क्रमावस्थओं को निर्धारित करेगा तथा नर्मदा सागर परियोजना और सरदार सरोवर यूनिट-2 नहरों के निर्माण कार्यक्रमों को समन्वित करेगा ताकि परियोजना के निर्माण के दौरान तथा इसके पूरा होने के बाद यह धन की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए समुचित लाभ शीघ्र प्राप्त किए जा सकें ।
3- प्राधिकरण संबंधित राज्यों के कार्य तथा व्यय दोनों की आवधिक प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करेगा तथा ऐसी रिपोर्ट प्राप्त होने पर परियोजना की विभिन्न यूनिटों के निर्माण की प्रगति का पुनर्विलोकन करेगा और यूनिट-1 बाँध तथा सम्बद्ध कार्य तथा यूनिट-3 सरदार सरोवर परियोजना के विद्युत परिसर को छोड़कर शेष कार्य शीघ्र करने के लिए संबंधित राज्य को ** जहाँ आवश्यक होगा, सलाह देगा । राज्य उप पैरा-3 (1) में उल्लेखित परियोजनाओं के संबंध में पूर्णता रिपोर्ट प्राधिकरण को प्रस्तुत करेगा ।
4- सरदार सरोवर परियोजना के अन्तर्गत जलमग्न होने वाली भूमि तथा सम्पत्ति के न्यायाधिकरण तथा इसे गुजरात को उपलब्ध कराने तथा उसके अन्तर्गत विस्थापितों को मुआवजा देने एवं उनके पुनर्वास के मामलों में अधिकरण के आदेशों के अधीन संबंधित राज्यों द्वारा समय-समय पर पूर्ण अनुपालन हेतु प्राधिकरण आवश्यकता पड़ने पर उपर्युक्त निर्देश जारी करेगा ।
* 3 जून, 1987 की अधिसूचना संख्या सं. ओ 554 (इ) के अनुसार सं शोधित । (संदर्भ : पैरा 9 उप पैरा (1) व उप पैरा (2) (ए)
** 28 अक्टूबर, 1990 के शुद्धि पत्र संख्या 872 (इ) के तहत ठीक किया गया । (संदर्भ उप पैरा (iii) एवं उप पैरा (v½
5- प्राधिकरण ऐसे प्रवाह और मापक, केन्द्रों, जहाँ आवश्यक हो स्वचालित रिकार्डरों से सज्जित, जलनिकासी, गाद और वाष्पीकरण प्रेक्षण केन्द्रों तथा मापक यंत्रों की संबंधित राज्य सरकारों अथवा किसी एक अथवा अधिक द्वारा स्थापना, अनुरक्षण तथा प्रचालन की सलाह देगा । * जैसा न्यायाधिकरण के आदेशों के उपबन्धों को क्रियान्वित करने के लिए तथा अपेक्षित रिकार्ड को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर आवश्यक हो । प्राधिकरण यदि आवश्यक समझे तो नर्मदा नदी प्रणाली से राजस्थान के लिए भेजे जाने वाली जल की मात्रा मापने के लिए मुख्य नहरों के शीर्ष तथा नहर क जल निकासी बिन्दु पर अनुमोदित प्रकार के माप यंत्र लगाने, उनके अनुरक्षण तथा प्रचालन के लिए संबंधित राज्यों से कह सकता है ।
6- प्राधिकरण द्वारा आवश्यक समझी जाने पर सभी केन्द्रों पर नर्मदा के प्रवाह का समवर्ती तथा सम्बद्ध रिकार्ड रखा जाएगा ।
7- न्यायाधिकरण के आदेश की धारा-9 में दिए मार्गदशी सिद्धान्तों के अनुसार प्राधिकरण जल विनियमन तथा लेखाकरण के लिए नियम बनाएगा । यह जल विनियमन तथा लेखा करण के लिए प्रत्येक दस दिन की अवधि के लिए प्रत्येक राज्य के जल का हिस्सा निर्धारित करेगा ।
8- प्राधिकरण (क) मध्य प्रदेश विनियमित निर्मुक्ति की मात्रा तथा स्वरूप (ख) ऐसी विनियमित निर्मुक्ति के भुगतान तथा लागत के बंटवारे के संबंध में न्यायाधिकरण के आदे शों का कार्यान्वयन सुनि6चित करेगा ।
9- प्राधिकरण संबंधित राज्य से प्रत्येक मौसम में नर्मदा जल द्वारा सिंचित क्षेत्रों, प्रत्येक जल विद्युत केन्द्र तथा नर्मदा सागर के अनुप्रवाह पर उत्पन्न विद्युत तथा सरदार सरोवर परियोजना से नदी के नीचे जाने वाले जल के घरेलू, नगर निगम तथा औद्योगिक अथवा अन्य किसी प्रयोजन के लिए जल निकासी के संबंध में ऑंकड़े एकत्र करेगा ।
10- प्राधिकरण जल वर्ष (पहली जुलाई से दूसरे वर्ष 30 जून तक) नर्मदा नदी तथा इसकी सहायक नदियों में बहने वाले जल की मात्रा ज्ञात करेगा ।
11- प्राधिकरण समय-समय पर प्रत्येक राज्य द्वारा जलाशयों तथा अन्य भण्डारणों में संचित किए गए जल की मात्रा ज्ञात करेगा और उस प्रयोजन के लिए कोई साधन अथवा तरीका अपना सकता है ।
12- प्राधिकरण उपयुक्त आवधिक अन्तराल पर राज्यों द्वारा नर्मदा जल का प्रयोग निश्चित करेगा अथवा किसी स्थान पर किसी समय पर किसी क्षेत्र में आवश्यक होने पर प्रयोजन के लिए नर्मदा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के सभी व्यपवर्तन तथा अवरोधों को ध्यान में रखेगा, चाहे वे प्राकृतिक हो अथवा कृत्रिम अथवा आं शिक रूप से प्राकृतिक अथवा कृत्रिम और जैसा भी उचित समझेगा ऐसे प्रयोग को किसी भी तरीके से नाप सकता है ।
13- प्राधिकरण अथवा इसके यथा प्राधिकृत किसी भी प्रतिनिधि को किसी भूमि तथा सम्पत्ति जिस पर किसी परियोजना अथवा किसी परियोजना का विकास अथवा मापक वाष्पीकरण अथवा अन्य जल विज्ञान केन्द्र अथवा मापक यंत्रों के किसी कार्य का किसी राज्य द्वारा निर्माण, प्रचालन अथवा अनुरक्षण किया गया है अथवा किया जा रहा है, पर प्रवेश करने की अनुमति होगी । सभी राज्य अपने-अपने उपर्युक्त विभागों के परिए प्राधिकरण तथा इस संबंध में इसक प्राधिकृत प्रतिनिधियों को सभी सहयोग और सहायता प्रदान करेंगे ।
14- आवश्यक पड़ने पर प्राधिकरण की बैठक बुलाई जाएगी तथा जल के उपयुक्त प्रबन्ध, विशेषकर न्यायाधिकरण के आदे शों के अनुसार नर्मदा नदी प्रणाली के भण्डारों के जल की निकासी के ढंग तथा ब्यौरों के संबंध में निर्णय करेगा । विशेषकर भराई मौसम के अन्त में प्राधिकरण की बैठक बुलाई जाएगी तथा नर्मदा नदी प्रणाली के भण्डारों के जल उपलब्धता का पुनर्विलोकन करेगा तथा बकाया भण्डारों को ध्यान में रखते हुए अगले सिंचाई मौसम के लिए उनके विनियमन का स्वयप निर्धारित करेगा ।
15- प्राधिकरण, सरदार सरोवर से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के तीन राज्यों को आवंटित विद्युत के हिस्से को पूरा करने के लिए विद्युत के उत्पादन तथा सम्प्रेषण के लिए निर्माण के सोपानवार कार्यक्रम तथा न्यायाधिकरण के आदे शों के अनुसार उसके भुगतान के लिए निर्देश देगा । प्राधिकरण यह भी सुनिश्चित करेगा कि सरदार सरोवर कॉम्प्लेक्स से विद्युत का उत्पादन तथा सम्प्रेषण आदेशों के अनुसार हो ।
* 28 अक्टूबर, 1990 के शुद्धि पत्र संख्या 872 (इ) के तहत ठीक किया गया (संदर्भ उप पैरा (iii) एवं उप पैरा (v½
16- प्राधिकरण भारी अवक्षेपण तथा दूरसंचार प्रणालियों की रिपोर्टिंग सहित, बाढ़ नियंत्रण की प्रभावी प्रणाली स्थापना, अनुरक्षण तथा प्रचालन के लिए उपयुक्त निर्देश जारी करेगा । संरचना की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी संरचना के प्रभारी मुख्य अभियंयता की होगी और ऐसा कोई भी निर्णय या आदे श जिससे उनकी राय में संरचना की सुरक्षा को खतरा होगा, उन पर बाध्य नहीं होगा । प्राधिकरण बाढ़ के दौरान जला शयों के प्रचालन के संबंध में ऑंकड़े वार्षिक रूप से प्रकाशित करायेगा तथा पक्षकार राज्यों को उपलब्ध कराएगा ।
4 अपने अनुभव को देखते हुए प्राधिकरण संकल्प द्वारा उप पैरा-3(i) से उप पैरा 3 (xvi) के कार्यों में संशोधन कर सकता है अथवा और जोड़ सकता है ।
5 सभी संबंधित राज्य नर्मदा घाटी विकास के संबंध में प्राधिकरण द्वारा माँगी गई सभी सम्बद्ध सूचना प्राधिकरण को शीघ्र प्रस्तुत करेंगे ।

10 प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट
प्राधिकरण यथासम्भव शीघ्र और किसी भी दशा में वर्तमान जल वर्ष (वर्ष के 1 जुलाई से अगले वर्ष 30 जून तक) की समाप्ति से पूर्व एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार कर भेजेगा जिसमें पूववर्ती वर्ष में प्राधिकरण द्वारा किए गए कार्यकलापों का उल्लेख होगा और केन्द्रीय सरकार तथा प्रत्येक पक्षकार राज्य को, उनमें से किसी के भी अनुरोध पर कोई भी जानकारी जो उसके पास है, किसी भी समय पक्षकार राज्यों एवं उनके प्रतिनिधियों के लिए सुलभ बनाए रखेगा । केन्द्र सरकार वार्षिक रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष प्रस्तुत करेगी ।

11 प्राधिकरण का अभिलेख और इसका स्थान
प्राधिकरण सभी बैठकों और कार्यवाहियों का अभिलेख रखेगा, नियमित लेखा रखेगा और उसका ऐसा उपयुक्त कार्यालय होगा जहाँ पर दस्तावेज, अभिलेख, लेखों, गेजिंग ऑंकड़े, केन्द्रीय सरकार तथा प्रत्येक पक्षकार राज्य की सरकारों या उनके प्रतिनिधियों के लिए प्राधिकरण द्वारा अवधारित समय एवं विनिमयों के अधीन निरीक्षण के लिए सुलभ करेंगे ।
नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के केन्द्रीय, क्षेत्रीय तथा उपक्षेत्रीय कार्यालयों का स्थान प्राधिकरण अवधारित करेगा । प्राधिकरण का मुख्यालय तब तक नई दिल्ली में रहेगा, जबकि वह किसी स्थायी स्थान के बारे में निर्णय नहीं करता ।

12 संविदाएँ और करार
प्राधिकरण ऐसी संविदाएँ और करार करेगा जो उसे प्रदत्त या उस पर अधिरोपित कार्यों एवंर् कत्तव्यों के पूर्णत: और समुचित निर्वहन के लिए आवश्यक और अनिवार्य है ।

13 वित्तीय उपबन्ध
1- प्राधिकरण द्वारा किए जाने वाले अपेक्षित सभी पूंजीगत और राजस्व व्यय मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान की राज्य सरकार बराबर रूप से वहन करेंगे । उक्त राज्यों की सरकारें, प्राधिकरण को उसके कार्यों के निर्वहन के लिए उसके द्वारा किए जाने वाले अपेक्षित सभी पूंजीगत और राजस्व व्यय के लिए आवश्यक धन प्रदान करेंगे । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण निधि नामक एक निधि गठिन की जाएगी, जिसमें राज्यों द्वारा दी गई धनराशियों तथा प्राधिकरण को प्राप्त धन राशियाँ जमा की जाएगी।
2- प्राधिकरण के गठन के पश्चात् मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों की सरकारें प्रारम्भ में प्राधिकरण की निधि में पाँच लाख रूपए का अं शदान प्रदान करेगी ।
3- प्राधिकरण प्रत्येक वर्ष सितम्बर मास में * पहली अप्रैल से प्रारम्भ होने वाली आगामी वर्ष के बाहर मास के दौरान अपेक्षित धनराशि के ब्यौरेवार प्राक्कलन तैयार करेगा । इन प्राक्कलनों में वह नीति दर्शित की जाएगी जिसमें ऐसा धन खर्च करने का प्रस्ताव है । प्राधिकरण इस विस्तृत प्राक्कलन की एक प्रति चारो राज्यों के सम्बद्ध **मुख्य सचिवों ** को 15 अक्टूबर से पूर्व अग्रेषित करेगा और उसमें वह राशि दशित करेगा जो आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रत्येक राज्य द्वारा अभिदाय के लिए अपेक्षित है । प्रत्येक राज्य सरकार, प्राधिकरण द्वारा दर्शित रूप से अपने अभिदाय का प्राधिकरण को संदय आगामी वर्ष 30 अप्रैल को या उससे पूर्व कर देगा ।
* 20 जनवरी, 1981 के शुद्धिपत्र संख्या एअो 45 (इ) के अनुसार ठीक किया गय (संदर्भ: पैरा 13 एवं उप पैरा (3))
** 3 जून, 1987 की अधिसूचना 554 (इ) के तहत जोड़ा गया । (संदर्भ: पैरा 13 एवं उप पैरा (3), (4) एवं (6) ब)

4- प्राधिकरण सभी प्राप्तियों और संवितरणों का ब्यौरा और सही लेखा रखेगा तथा प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद वार्षिक लखा विवरण तैयार करेगा और उसकी प्रतियाँ सम्बद्ध महा लेखाकारों तथा चारो राज्यों के संबंधित * मुख्य सचिवों * को भेजेगा । वार्षिक लेखा विवरणों का प्रारूप प्राधिकरण द्वारा रखे गए केन्द्रीय सरकार तथा पक्षकार राज्यों की सरकारों के लिए विधिक प्राधिकृत प्रतिनिधि या प्रतिनिधियों के माध्यम से सभी उपयुक्त अवसरों पर निरीक्षण के लिए खुले रहेंगे ।
5- प्राधिकरण की निधि से संवितरण केवल ऐसी रीति से किए जाएँगे जैसा प्राधिकरण विहित करें । प्राधिकरण अपने कार्योंके निर्वहन में किसी आकस्मिक स्थिति का सामना करने मं ऐसा व्यय कर सकता है, जैसा वह उचित समझे ।
6- प्राधिकरण द्वारा रखे गए लेखों की लेखापरीक्षा, भारत का नियंत्रण एवं महा लेखापरीक्षक या उसका नामिती करेगा जो प्राधिकरण के वार्षिक लेखों को ऐसे सम्प्रेषणें के अधीन रहते हुए जैसे वह करना चाहे, प्रमाणित करेगा । प्राधिकरण भारत के नियंत्रक एवं महा लेखापरीक्षक की रिपोर्ट की प्रतियाँ महा लेखाकार और चारों राज्यों के सम्बद्ध मुख्य सचिवों को भेजेगा और उसे वार्षिक रिपोर्ट में भी सम्मिलित करेगा ।

14 प्राधिकरण के विनिश्चिय
**पैरा-9 के अन्तर्गत आने वाले सभी मामलों के सम्बद्ध प्राधिकरण के विनिश्चिय अन्तिम तथा सभी पक्षकार राज्यों पर बाध्यकारी होंगे ।

15 सन्निर्माण प्राधिकरण की अधिकारिता के बाहर
अधिकरण के आदेश में जैसा निहित है, उस सीमा और उसके सिवाय परियोजनाओं की योजना उनका सन्निर्माण प्रत्येक राज्य सरकारें अपने अभिकरणों के माध्यम से कराएगी ।
II पुनर्विलोकन समिति

16 1. एक पुनर्विलोकन समिति होगी जो स्वप्रेरणा से या किसी पक्षकार राज्य *** या सचिव, भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय *** के आवेदन पर प्राधिकरणके किसी विनिश्चिय का पुनर्विलोकन करेगी । तात्कालिक मामलों में पुनर्विलोकन समिति का अध्यक्ष किसी पक्षकार राज्य की सरकार *** या सचिव, भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय *** के आवेदन पर पुनर्विलोकन करने के संबंध में अंतिम विनिश्चिय होने तक प्राधिकरण के किसी आदे श के निष्पादन को रोक सकता है ।
3- पुनर्विलोकन समिति के अध्यक्ष सहित निम्नलिखित ** छ: *** सदस्य होंगे ।
(i) केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री अध्यक्ष (अ) *** केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री*** सदस्य
(ii) मुख्यमंत्री, मध्यप्रदे श सदस्य
(iii) मुख्यमंत्री, गुजरात सदस्य
(iv) मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र सदस्य
(v) मुख्यमंत्री, राजस्थान सदस्य
भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव पुनर्विलोकन समिति के संयोजक होंगे, किन्तु उन्हें मत देने का अधिकार नहीं होगा । यदि किसी पक्षकार राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो तो राज्य का राज्यपाल या उसका प्राधिकृत प्रतिनिधि पुनर्विलोकन समिति के सदस्य के रूप में कार्य करेगा ।
* 3 जून, 1987 की अधिसूचना 554 (इ) के तहत जोड़ गया । (संदर्भ : उप पैरा (3), (4) एवं (6)
** 28 अक्टूबर, 1990 के शुद्धिपत्र संख्या एस.ओ 872 (इ) के तहत ठीक किया गया (संदर्भ : पैरा (iii) एवं उप पैरा (v½
*** 3 जून, 1987 के शुद्धिपत्र संख्या 554 (इ) के तहत जोड़ा गया । (संदर्भ : 16 उप पैरा (1) एवं (2)
3 पक्षकार राज्यों के मुख्यमंत्री अपने-अपने सिंचाई मंत्रियों को साधारणतया या विशेष रूप से वैकल्पिक सदस्य के रूप में नाम निर्दिष्ट कर सकेंगे तथा ऐसे मंत्रियों को मतदान एवं विनिश्चिय आदि करने की पूर्ण शक्तियाँ प्राप्त होंगी ।
4 पुनर्विलोकन समिति प्राधिकरण के विनिश्चिय का ऐसी बैठक में पुनर्विलोकन कर सकेगी जिसमें अध्यक्ष और पुनर्विलोकन समिति के सदस्य उपस्थित हों । पुनर्विलोकन समिति के सभी विनिश्चिय सर्वसम्मति से होंगे । सर्वसम्मति से न हो पाने की दशा में विनिश्चिय अयक्ष सहित सदस्यों के बहुमत से किया जाएगा ।
5 संयोजक, पुनर्विलोकन समिति प्रस्तावित बैठक की अग्रिम सूचना, उसकी कार्यसूची और कार्यसूची पर टिप्पणियाँ पक्षकार राज्यों की सरकारों को भेजेगा ।
6 पुर्विलोकन समिति का विनिश्चिय लेखबद्ध किया जाएगा और अन्तिम होगा तथा पक्षकार राज्यों पर बाध्यकारी होगा ।

17 *प्राधिकरण केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति से स्कीम के उद्देश्य को प्रभावी बनाने के लिए नियम बना सकता है |
२२ नवंबर १९८२ की अधिसूचना संख्या एस. ओ. ८५६ (इ) के तहत सम्मिलित किया गया

 
 
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