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नहर
16295 क़िमी लम्बी ओंकारेश्वर नहर से 2833 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य कमाण्ड क्षेत्र में एवं 1468 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई करना प्रस्तावित है । नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा साथ में नहर के कार्य भी किए जाने के लिए ले लिए गए हैं । नहर के कार्यों को चार चरणों में विभक्त किया गया है । प्रथम चरण में 54630 हेक्टेयर के कृषि योग्य कमाण्ड क्षेत्रों में, द्वितीय चरण में 19578, तृतीय चरण में 48592 तथा चर्तुथ चरण में 54630 हेक्टेयर के कृषि योग्य कमाण्ड क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी । दिनांक 24.08.2009 क़ो आयोजित परामर्श समिति की 11 वीं बैठक में सिंचाई, बाढ़ एवं बहुउद्देशीय परियोजनाओं के लिए तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए जुलाई, 2009 के मूल्य स्तर पर यूनिट-2 (नहर) की पुन: परिशोधित अनुमानित लागत के रूप में रू 2504.80 क़रोड़ की राशि अनुमोदित की गई है । पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पर्यावरण स्वीकृति (संदर्भ: पत्र सं 2991एफसी दिनांक 22.10.1993) में प्राप्त कर ली गई थी तथा उस पर योजना आयोग ने भी मई, 2001 में निवेश स्वीकृति प्रदान कर दी थी ।

सड़क पुल निर्माण सहित मुख्य जल सेतु के कार्यों को पहले ही पूर्ण किया जा चुका है । चरण-1 के अन्तर्गत कार्य लगभग पूर्ण किए जा चुके थे जबकि चरण-2 एवं चरण-3 के कार्यों को 20 प्रतिशत तक पूर्ण किया जा चुका है । चरण-2 के कार्य अभी शुरू किए जाने है । 154 किमी लम्बाई की दाँयी तटीय उद्वहक नहर (लिफ्ट केनाल) को 1239 क़िमी लम्बाई की सामान्य संवाहक नहर (कॉमन कैरियर केनाल) से तैयार की जानी प्रस्तावित है । उद्वहक नहर के सर्वेक्षण, नियोजन एवं डिजाइनिंग से जुड़े परार्मशदात्री कार्यों (कन्सल्टेन्सी) को करने के लिए दे दिया गया है तथा कार्य प्रगति में है ।

त्वरित सिंचाई लाभ योजना के अन्तर्गत उपलब्ध कराई गई निधि

भारत सरकार ने इस परियोजना को त्वरित सिंचाई लाभ योजना में सम्मिलित किया है । मार्च, 2009 तक भारत सरकार ने ओंकारेश्वर परियोजना की नहरों के लिए मध्य प्रदेश सरकार को रू 246.776 क़रोड़ दिए ।

व्यय का विवरण

मार्च, 2009 तक नहर कार्यों पर रू 292.80 क़रोड़ कुल व्यय किए जा चुके हैं।

नर्मदा बचाओ आंदोलनकारियों ने जबलपुर के माननीय उच्च न्यायालय में ओंकारेश्वर परियोजना के अन्तर्गत पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास कार्यों को पूर्ण करवाने के संबंध में एक रिट याचिका (क्रमांक 4457वर्ष 2007) दायर की थी । मामले पर दिनांक 21 फरवरी, 2008 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय पर माननीय उच्चतम न्यायालय (क्रमांक 7971 वर्ष 2008) में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आपत्ति दर्ज की गई थी । माननीय उच्चतम न्यायालय ने उन विस्थापितों को भूमि के आवंटन के प्रश्न पर जो सम्पूर्ण मुआवजा पहले ही ले चुके हैं एवं बालिग पुत्रों को भूमि के आवंटन के सम्बन्ध के आदेश पर 'रोक आदेश' जारी कर दिया गया था, मामला पूर्णत: अभी निर्णित नहीं हुआ है ।
 
 
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