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ओंकारेश्वर परियोजना
परियोजना की विशिष्टताएँ

ओंकारेश्वर परियोजना, इंदिरा सागर परियोजना से 40 किमी अनुप्रवाह पर मध्य प्रदेश में स्थित है । इस परियोजना में 949 मीटर लम्बा एवं 73 मीटर अधिकतम ऊँचाई वाला एक कांक्रीट बाँध मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले में मांधता ग्राम के निकट नर्मदा नदी पर बनाया जा रहा है । परियोजना से 1468 लाख हेक्टेयर कमाण्ड क्षेत्र में सिंचाई करना प्रस्तावित है । इस प्रकार इस परियोजना से 2833 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की कृषि योग्य भूमि में वार्षिक सिंचाई एवं 520 मेगावॉट (8 x 65 मेगावॉट) स्थापित क्षमता के विद्युत उत्पादन प्रस्तावित है । मध्य प्रदेश शासन एवं राष्ट्रीय जल विद्युत निगम (एनएचपीसी) क़े संयुक्त उपक्रम नर्मदा जल विद्युत विकास निगम (एनएचड़ीसी) ने ओंकारेश्वर परियोजना के कार्यों को पूर्ण करने के कार्य अपने हाथ में ले लिए हैं । युनिट-2 (नहरें) से सम्बन्धित कार्य मध्य प्रदेश शासन द्वारा किया जाना है । परियोजना के यूनिट-1 एवं यूनिट-3 के कार्यों को नर्मदा जलविद्युत विकास निगम द्वारा ले लिए जाने के पश्चात इसमें आने वाली लागत के पूर्व प्राक्वलित राशि को संशोधित किया गया और तत्प6चात् केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के नवम्बर, 2002 के मूल्य स्तर के आधार पर अनुमानित लागत रू 2224.73 क़रोड़ आंकी है । ओंकारेश्वर परियोजना की जुलाई-2007 मूल्य स्तर पर तथा यूनिट-2 (नहरें) की संशोधित लागत रू 2175.59 क़रोड़ ऑंकी गई है । इस परियोजना से कुल 98273 परिवारों के लाभान्वित होने की आशा है, जिसमें से 7601 (8 प्रतिशत) अनुसूचित जाति वर्ग से, 39953 (40 प्रतिशत) अनुसूचित जनजाति वर्ग से तथा 50676 सामान्य वर्ग से हैं ।

बाँध एवं विद्युत गृह

यूनिट-1 एवं यूनिट-3 से संबंधित कार्यों को पूर्ण कराने के लिए प्राप्त निविदाओं को फरवरी, 2003 में खोला गया था तथा उक्त कार्यों को मेसर्स जय प्रकाश वोइथ सीमेन्स कन्सोरटियम, नई दिल्ली को करने के लिए सुपुर्द कर दिए गए थे । टर्नकी आधार पर निष्पादन करने के लिए 18 जुलाई, 2003 को रू 1476.4 क़रोड़ के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, उसके पश्चात बाँध एवं विद्युत गृह बाँध, पेनस्टाक, पॉवर इनटेक, आवाही कुल्या वाहिका (हेड रेस चेनल), अंत्य कुल्या वाहिका (टेल रेस चेनल) एवं स्वीचयार्ड सहित मुख्य बाँध के सभी बृहत कार्य पूर्ण कर लिए गए थे । बाँध एवं विद्युत गृह में परिष्करण (फिनिशिंग) तथा विभिन्न वास्तुशिल्प के कार्य प्रगति पर है । बाँध के सभी 23 रेडियल गेट स्थापित किए जाने, क्रियाशील किए जाने और परीक्षण किए जाने के कार्य तथा स्टाप लॉग गेन्ट्री क्रेन को स्थापित किए जाने के कार्य पूरे कर लिए गए थे । विद्युत गृह के सभी आठों इनटेक फिक्सड व्हील गेट, आठ ड्राफ्ट टयूब गेट एवं बल्क हेडगेड के दो सेट, इनटेक गेन्ट्री क्रेन एवं ड्राफ्ट टयूब गेन्ट्री केन के कार्य पूरे कर लिए गए थे। सभी आठों यूनिट पर इलेक्ट्रो-मेकेनिकल के कार्यों में स्पायरल केसिंग क्रांक्रीटिंग, पिट फ्री, बस डक्ट को स्थापित किए जाने के कार्य, जनरेटर ट्रांसफार्मर पिट एवं स्वीचयार्ड में स्टेटर स्टेकिंग और वान्डिंग आदि के कार्य पूरे कर लिए गए थे । कार्य पूर्ण करने के पश्चात सभी युनिटों को 20 अगस्त, 2007 से 15 नवम्बर की अवधि में चालू करके यूनिट-1 से 8 तक की यूनिटों से बिजली उत्पन्न करना आरम्भ कर लिया गया । कुल लगभग 5960 परिवारों के प्रभावित होने की आशा है, जिसमें से मार्च, 2009 तक 3227 परिवारों का पुनर्वास पूर्ण किया जा चुका है तथा 2733 परिवारों (अंतिम सर्वेक्षण पर उक्त संख्या परिवर्तनीय) का पुनर्वास किया जाना अभी शेष है ।

बाँध विद्युत गृह के कार्य एवं गेटो को स्थापित कर लिए जाने के बावजूद जलाशय को इसके पूर्ण जलाशय स्तर 19660 मीटर तक नहीं भरा जा सकता । माननीय उच्चतम न्यायालय ने दिनांक 11 जून, 2007 को दिए अपने आदेश से माननीय उच्च न्यायालय की जबलपुर (मप्र) ख़ण्डपीठ के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी और तत्पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय की जबलपुर (मप्र) ख़ण्डपीठ ने दिनांक 17 अगस्त, 2007 को ओंकारेश्वर जलाशय को 189 मीटर के जलाशय स्तर पर रखने के आदेश दिए, जिससे विद्युत ऊर्जा उत्पादन की यूनिटों को चालू किया जा सका तथा अगस्त, 2007 से विद्युत ऊर्जा का आंशिक उत्पादन आरम्भ हो गया ।

मध्यप्रदेश के माननीय उच्च न्यायालय की जबलपुर ने ओंकारेश्वर जलाशय को आगे 189 मीटर के जलाशय स्तर पर बनाए रखने के आदेश दिए । मार्च, 2009 तक परियोजना से कुल 150182 मिलियन यूनिट बिजली उत्पन्न की गई, जिसमें से वर्ष 2008-09 के दौरान निर्धारित किए 72574 क़रोड़ व्यय किए जा चुके हैं, जिसमें से वर्ष 2008-09 के दौरान यूनिट-1 (बाँध) एवं यूनिट-3 (विद्युत) पर रू 2224.44 क़रोड़ व्यय किए गए ।
 
 
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