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पक्षकार राज्यों की पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास नीति

मुख्य उद्देश्य

राज्यों द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास नीति के मुख्य उद्देश्य निम्नानुसार है :

  • परियोजना से प्रभावित परिवारों की अर्थव्यवस्था व जीवन स्तर में सुधार करना, जैसा कि विस्थापित होने से पूर्व उनको उपलब्ध थे ।
  • परियोजना से प्रभावित परिवारों को, जहाँ तक सम्भव हो, उनके अधिमानों के अनुरूप ग्राम इकाई, ग्राम अनुभाग, उपग्राम या परिवार समूह के अनुरूप ही विस्थापित करना ।
  • परियोजना से प्रभावित परिवारों को उस समुदाय से जहाँ वे पुनर्व्यवस्थापित किए गए हैं, पूर्ण रूप से एकीकरण
  • विस्थापितों को उचित मुआवजा तथा पर्याप्त सामाजिक एवं भौतिक पुनर्वास के साथ-साथ सामुदायिक सेवाएँ एवं सुविधाएँ उपलब्ध करवाना ।
  • परियोजना से प्रभावित परिवारों की पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास (पु एवं पु) क़ार्यों में भागीदारी सुनिशचित करना ।

राज्यों की उदारीकृत पुनर्व्थवस्थापन एवं पुनर्वास नीति

जलाशय डूब से प्रभावित व्यक्तियों के सामाजिक व आर्थिक पृष्ठ भूमि को ध्यान में रखते हुए एवं उनके जीवन स्तर को सुधारने की आव6यकता पर विचार करते हुए महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश की राज्य सरकार ने पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास की जिन नीतियों का संरूपण एवं घोषणा की है, वे नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के अन्तिम आदेशों व निर्णयों में की गई व्यवस्थाओं से अधिक उदार है ।  इन नीतियों को समय-समय पर आवश्यकता उत्पन्न होने पर और भी अधिक उदार किया जा रहा है ।  महाराष्ट्र सरकार प्रत्येक विस्थापित परिवार को रू 4,500 निर्वाह भत्ते के अतिरिक्त सभी श्रेणी के विस्थापितों के बालिक पुत्रों तथा बालिक अविवाहित पुत्रियों तथा प्रत्येक भूमिहीन विस्थापितों को न्यूनतम एक हेक्टेयर कृषि भूमि आवंटित कर रही है ।  इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र में परियोजना प्रभावित व्यक्तियों द्वारा अधिग्रहीत की गई भूमि एवं मकान के बदले उनको नकद मुआवजा देने व नि:शुल्क भूमि के आवंटन करने का प्रावधान भी किया हुआ है ।  गुजरात सरकार भूमिहीन कृषि मजदूरों को अब दो हेक्टेयर भूमि आवंटित कर रही है तथा सभी वर्ग के विस्थापित परिवारों के बालिक पुत्रों को दो हेक्टेयर भूमि (ये उक्त हितलाभ विस्थापित परिवारों के उन पुत्रों को ही प्राप्त हो सकेंगे, जो जनवरी, 1987 को बालिक थे तथा विस्थापित परिवार एवं उनके बालिक पुत्रों को तैयारशुदा कोर मकान अथवा कोर मकान का निर्माण कराने के लिए वित्तीय सहायक के रूप में रू 45,000 क़ी वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा मध्य प्रदेश सरकार ने भारत सरकार की पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास समिति 2007 में उल्लेखित दिशा-निर्देशों के आधार पर नर्मदा परियोजनाओं के विस्थापितों की पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास नीति को अद्यतन कर लिया है एवं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जातिअनुसूचित जनजातिभूमिहीन कृषि मजदूरलघु एवं सीमान्त कृषक के पुनर्वास अनुदान की राशि  11,000 से बढ़ाकर 18,700 और अन्य मजदूर एवं भूमिहीन परिवारों को रू 5,500 से बढ़ाकर 9,350 कर दिया गया है ।  परिसम्पत्ति क्रय करने को उदारीकृत बनाया गया है, ।  इसके अनुसार अनुसूचित जातिअनुसूचित जनजाति भूमिहीन कृषि मजदूरों को परिसम्पत्ति क्रय करने की राशि  को रू 29,000 से बढ़ाकर 49,300 तथा अन्य मजदूरों एवं भूमिहीन परिवारों को रू 19,500 से बढ़ाकर रू 33,150 क़र दिया है ।  आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों हेतु वर्तमान कल्याणकारी योजनाएँ जैसे एकीकृत ग्रामीण विकास कार्यक्रम (आईआरड़ीपी), ग़्रामीण युवकों के स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण (ट्राईसेम), आदिवासी उपयोजना कार्यक्रम (टीएसपी), ख़ादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड (केवीआईबी) इत्यादि को परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्वास स्थलों तक बढ़ा दिया गया है ।  

परियोजना से प्रभावित परिवारों को गुजरात राज्य में या अपने मूल राज्य में पुनर्वास के लिए अपनी पसन्द के अनुसार स्वयं चयन करना है ।  यह उनके सांस्कृतिक, जातीय तथा अन्य सामुदायिक विशिष्टताओं को यथासम्भव अक्षुण्ण बनाए रखने तथा इसे सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा ।

सरदार सरोवर परियोजना हेतु नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड

एवं राज्यों की उदारीकृत नीतियों के अनुसार पुनर्वास नीति 

क्र मद नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण मध्यप्रदेश गुजरात महाराष्ट्र
01 विस्थापित की परिभाषा विस्थापित से तात्पर्य एक ऐसे व्यक्ति से है जो भूमि अधिनियम की धारा-4 के अन्तर्गत अध्यादेश के प्रकाशित होने की तिथि के एक वर्ष पूर्व से उस भूमि में साधारणतया निवास करता आ रहा है या उस भूमि पर कृषि कार्य करता आ रहा है या कोई व्यवसाय या उपजीविका के साधन के रूप में उस भूमि का उपयोग करता आ रहा है, जो भूमि स्थायी या अस्थायी तौर से डूम के अन्तर्गत आने वाली है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के उपखण्ड XL-1(2) के अनुरूप नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के उपखण्ड XL-1(2) के अनुरूप नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के उपखण्ड XL-1(2) के अनुरूप
02 परिवार परिवार के अन्तर्गत पति, पत्नी एवं नाबालिग बच्चे तथा परिवार के मुखिया पर आश्रित अन्य व्यक्ति जैसे विधवा माता आदि सम्मिलित है । परिवार से तात्पर्य पति, पत्नी एवं नाबालिग बच्चों से है तथा इसमें अन्य वे व्यक्ति भी सम्मिलित हैं, जो परिवार के मुखिया पर आश्रित हैं जैसे विधवा माता, विधवा बहन, वृद्ध पिता, बालिग पुत्र, अविवाहित बहन एवं अविवाहित पुत्री को एक अलग परिवार के रूप में माना जाएगा। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के उपखण्ड XL-1(3) के अनुरूप नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के उपखण्ड XL-1(3) (ii) के अनुरूप
03(अ) भूमि आवंटन भूमि धारक प्रत्येक विस्थापित परिवार जिसकी 25 प्रतिशत से अधिक कृषि भूमि अधिग्रहित कर ली हो वह अपनी अधिग्रहित की गई भूमि के बराबर सिंचन योग्य भूमि पाने का हकदार होगा, जिसकी अधिकतम सीमा सम्बन्धित राज्यों द्वारा निर्धारित की गई सीमा के अधीन होगी तथा इसकी न्यूनतम सीमा प्रति परिवार दो हेक्टेयर (पाँच एकड़) भूमि होगी तथा आवंटित भूमि पर सिंचाई सुविधाएँ उस राज्य द्वारा सुलभ करवाई जाएगी जिस राज्य सीमा के अन्तर्गत इस प्रकार की उक्त आवंटित भूमि स्थित है । विस्थापित परिवार की सहमति मिलने की स्थिति में ये भूमि उसके पक्ष में हस्तांतरित की जा सकेगी । इसके लिए चुकाए जाने वाला मूल्य गुजरात एवं संबंधित राज्य की पारस्परिक सहमति पर निर्भर करेगा । विस्थापित परिवार को आवंटित भूमि का मूल्य चुकाने के लिए विस्थापित परिवार की अधिग्रहित भूमि के बदले मुआवजे के रूप में दी जाने वाली कुल राशि की 50 प्रतिशत राशि को आरम्भिक किश्त के भुगतान के रूप में समायोजित किया जाएगा तथा आवंटित की गई भूमि के शेष मूल्य को आवंटित तथा मुआवजे के रूप में प्राप्त राशि से ब्याज निर्मुक्त 20 वार्षिक किश्तों में वसूल किया जाएगा । भूमि मध्य प्रदेश या महाराष्ट्र में आवंटित किए जाने की स्थिति में आवंटित की गई भूमि से सम्बन्धित सभी वसूली गुजरात राज्य के पक्ष में की जाएगी । 1- विस्थापित परिवार को उनकी अधिग्रहित भूमि के बराबर भूमि आवंटित की जाएगी । इस आवंटित भूमि की न्यूनतम सीमा दो हेक्टेयर तथा अधिकतम सीमा आठ हेक्टेयर होगी । यदि आवंटित की गई भूमि पर अब तक सिंचाई कार्य नहीं हुआ है तो शासकीय सहायता द्वारा कुओंनलकूपों की व्यवस्था करवाकर सिंचाई सुविधाएँ सुलभ करवाई जाएगी। यदि भूमि पर सिंचाई सम्भव नहीं है तो न्यूनतम चार हेक्टेयर भूमि आवंटित की जाएगी तथा असिंचित भूमि के विकास हेतु सरकार द्वारा आर्थित सहायता सुलभ करवाई जाएगी । इस प्रकार के सुलभ करवाई गई सहायता इस कार्य में किए गए कुल व्यय के 75 प्रतिशत तक सीमित होगी । 2 (अ) दो हेक्टेयर कृषि भूमि तक के सभी अनुसूचित जातिअनुसूचित जनजाति तथा अन्य वर्ग के परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा ये राशि आवंटित की गई भूमि के मूल्य व मुआवजे की राशि के अंतर के बराबर होगी एवं अन्य परिवारों को जिनके पास दो से आठ हेक्टेयर तक भूमि है, अतिरिक्त राशि प्राप्त करने की पात्रता होगी। ये राशि आवंटित की गई राशि तथा मुआवजा के रूप में प्राप्त राशि के अन्तर का 50प्रतिशत या रू 2,000 प्रति हेक्टेयर (इसमें से जो कम हो) निर्धारित की जाएगी । (ब) विस्थापित परिवारों के समक्ष दो विकल्प है :- (i) वे अपनी डूब में आई भूमि के बदले मुआवजे की राशि नगद रूप में प्राप्त कर सकते हैं । (ii) वे विकल्प के रूप में अपने पक्ष में भूमि का आवंटन होना अपना सकते हैं, इस स्थिति में उन्हें मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि नकद रूप में लेने की पात्रता होगी तथा शेष 50 प्रतिशत मुआवजे की राशि आवंटित भूमि के मूल्य के पक्ष में समायोजित होगी तथा आवंटित भूमि का शेष मूल्य 20 वार्षिक किश्तों में ऋण के रूप में वसूल लिया जाएगा। जो उक्त समायोजन के तीसरे वर्ष में देय होगा । यह ऋण ब्याज निर्मुक्त होगा । (स) मध्यप्रदेश सरकार ने भूमि बैंक से परियोजना प्रभावित पात्र परिवारों को कृषि योग्य भूमि आवंटित की है और ऐसे परियोजना प्रभावित परिवारों को विशेष पुनर्वास पैकेज के अन्तर्गत अपनी पसन्द के अनुरूप भूमि क्रय करने का विकल्प दिया गया है। परियोजना प्रभावित परिवारों को भूमि क्रय करने पर उन्हें स्टाम्प डयूटी एवं रजिस्ट्रेशन फीस चुकाने में छूट दे दी गई है । छूट की सीमा मुआवजे के रूप में पुनर्वास अनुदान, विशेष पुनर्वास पैकेज के अन्तर्गत प्राप्त राशि की सीमा तक ही सीमित रहेगी । 1- विस्थापित परिवार को उनकी अधिग्रहित भूमि के बराबर भूमि आवंटित की जाएगी । आवंटित भूमि की न्यूनतम सीमा दो हेक्टेयर तथा अधिकतम सीमा राज्य द्वारा निर्धारित सीमा के अधीन होगी । अधिग्रहीत भूमि के सह हिस्सेदार के रूप में संयुक्त धारक एवं बालिग पुत्रों को भी सम्मिलित किया जाएगा। सिंचाई सुविधाएँ राज्य द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी । (2) जहाँ विस्थापित परिवार द्वारा कृषि भूमि समिति के माध्यम से क्रय की गई हो, ऐसी स्थिति में इस प्रकार क्रय की गई भूमि की मूल्य राशि तथा मुआवजे के रूप में दी जाने वाली राशि के अन्तर को (यदि कोई हो) अनुग्रह राशि के रूप में विस्थापित परिवार को भुगतान किया जाएगा । (3) वे भूधारक विस्थापित परिवारअतिक्रमणकर्ता जिन्होंने भूमि का मुआवजा प्राप्त कर लिया है । उनके पास यह विकल्प है कि वे मुआवजे के रूप में प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत आवंटित भूमि के मूल्य के पक्ष में आरंभिक किश्त के रूप में जमा करा दे तथा भूमि के मूल्य की शेष राशि को ब्याज निर्मुक्त वार्षिक किश्तों में 20 वर्षों तक जमा कराएँ या मुआवजा राशि का शत-प्रतिशत आवंटित भूमि के मूल्य के पक्ष में जमा कराएँ । इस स्थिति में आवंटित भूमि का मूल्य तथा मुआवजे के अन्तर की राशि को अनुग्रह राशि के रूप में मान लिया जाएगा । अन्य वर्गों जैसे भूमिहीन कृषि मजदूर, अतिक्रमणकर्ता (जिन्होंने मुआवजे की राशि प्राप्त नहीं की है) व उनके बालिग पुत्रों को आवंटित भूमि के मूल्य के पक्ष में पूर्ण अनुग्रह राशि दी जाती है । 1- विस्थापित परिवार को उनकी अधिग्रहित भूमि के बराबर भूमि आवंटित की जाएगी । आवंटित भूमि की न्यूनतम सीमा दो हेक्टेयर तथा अधिकतम सीमा राज्य द्वारा निर्धारित सीमा के अधीन होगी । अधिग्रहीत भूमि के सह हिस्सेदार के रूप में संयुक्त धारक एवं बालिग पुत्रों को भी सम्मिलित किया जाएगा । सिंचाई सुविधाएँ राज्य द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी । 2 विस्थापित परिवार को आवंटित भूमि मूल्य निर्मुक्त है ।
(ब) अतिक्रमणकर्ता विस्थापित परिवार किसी भी प्रकार के भूमि आवंटन के हितलाभ का हकदार नहीं । (क) इनको भूधारक विस्थापितों के रूप में समझा जाएगा जो निम्न दो शर्तों के अधीन होगा : (i) अतिक्रमण 13 अप्रैल, 1987 या इसके पूर्व का होना चाहिए (ii) कृषि भूमि का आवंटन केवल एक हेक्टेयर या दो हेक्टेयर तक सीमित है, जिसका मुआवजा अतिक्रमित भूमि के क्षेत्रफल एवं डूब के अंतर्गत आ रही भूमि को देखकर निश्चित किया जाएगा । (ख) अतिक्रमणकर्ता डूब में आने वाली भूमि के बदले मुआवजा राशि पाने के हकदार हैं सम्बद्ध अधिनियम की धारा-4 के अन्तर्गत अध्यादेश के जारी होने की तारीख के एक वर्ष पूर्व के अतिक्रमणकर्ता दो हेक्टेयर भूमि तथा अतिक्रमित भूमि के लिए मुआवजा अनुग्रह राशि के रूप में प्राप्त होगा । 31 मार्च, 1978 तक की अतिक्रमित भूमि के लिए दो हेक्टेयर भूमि तथा शेष अतिक्रमित भूमि के लिए मुआवजा अनुग्रह राशि के रूप में दिया जाएगा तथा 31 मार्च, 1978 के पश्चात के अतिक्रमणकर्ता को भूमिहीन के रूप में माना जाएगा तथा वे एक हेक्टेयर कृषि भूमि पाने के हकदार होंगे।
(स) भूमिहीन विस्थापित परिवार भूमि आवंटन का कोई प्रावधान नहीं भूमि का प्रावधान नहीं। मध्य प्रदेश शासन की उदारीकृत पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास नीति में (पत्र संख्या 12127 298 1286- 4.12.2001 क़े अनुसार) नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के उपर एवं अतिरिक्त भी सभी भूमिहीन कृषक मजदूरों एवं सभी अनुसूचित जनजाति के भूमिहीन विस्थापित परिवारों को प्रति परिवार रू 49,300 क़ी राशि उत्पादक सम्पत्ति के लिए तथा अन्य भूमिहीन परिवारों को रू 33,150 क़ी राशि प्रदान की जाएगी। केवल भूमिहीन कृषि मजदूरों को दो हेक्टेयर भूमि आवंटित की जाएगी । यदि विस्थापित परिवार अन्य विस्थापितों के साथ आता है तो एक हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी ।
(द) सभी वर्ग के विस्थापित परिवारों के बालिग पुत्र प्रत्येक बालिग पुत्र को एक अलग परिवार के रूप में समझा जाएगा । भूमि आवंटन का कोई प्रावधान नहीं । माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 15 मार्च को दिए गए निर्णयानुसार भूधारक विस्थापितों के बालिग पुत्र 2 हेक्टेयर भूमि पाने के हकदार होंगे। प्रत्येक बालिग पुत्रों, अविवाहित बालिग पुत्रियों को एक अलग परिवार के रूप में समझा जाएगा । उनके बालिग होने की पात्रता (18 वर्ष की उम्र) भूमि अधिग्रहण अवार्ड की धारा 74 के अन्तर्गत जारी की गई अधिसूचना की तारीख से एक वर्ष पूर्व की मान्य होगी। वे नकद भुगतान प्राप्त करने के हकदार होंगे जो उनके सम्बन्धित श्रेणी के अनुसार देय होगा। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा 15 मार्च, 2005 को दिए गए निर्णय के अनुसार भू-धारक परियोजना प्रभावित परिवारों के बालिग पुत्रों को दो हेक्टेयर भूमि आवंटित की जाएगी । सभी वर्ग के विस्थापित परिवारों के बालिग पुत्रों को दो हेक्टेयर भूमि उक्त हितलाभ विस्थापित परिवारों के उन पुत्रों को ही प्राप्त हो सकेंगे, जो 1 जनवरी 1987 को बालिग थे । प्रत्येक बालिग पुत्रोंअविवाहित बालिग पुत्रियों को एक अलग परिवार के रूप में समझा जाएगा । उनके बालिग होने की पात्रता (18 वर्ष की उम्र) भूमि अधिग्रहण अवार्ड की धारा-4 के अन्तर्गत जारी की गई अधिसूचना की तारीख से एक वर्ष पूर्व की मान्य होगी । दिनांक 26 फरवरी, 1992 के जीअारपर महाराष्ट्र सरकार ने दिनांक 21 अप्रैल, 2007 संशोधन करके वर्ष 1992 की उदारीकृत नीति के अनुसार पूर्व में बालिग पुत्रियों को आवंटित की गई एक हेक्टेयर भूमि को बढ़ाकर दो हेक्टेयर भूमि पाने का हकदार कर दिया है।
4 गृह भूखण्ड प्रत्येक विस्थापित परिवार के पक्ष में मूल्य रहित गृह भूखण्ड का आवंटन जिसके क्षेत्रफल 1829 x 2743 मीटर (60' x 90' होगा । इसमें विस्थापित परिवार के बालिग पुत्र भी सम्मिलित है । विस्थापित परिवारों एवं उनके बालिग पुत्रों अविवाहित पुत्रियों को आवासीय विकसित भूखण्ड दिया जाएगा। (1) डूब के अन्तर्गत आ रहे ग्रामीण क्षेत्र के लिए 502 वर्ग मीटर (60X60) का आवासीय विकसित भूखण्ड दिया जाएगा।(2) डूब के अन्तर्गत आ रहे शहरी क्षेत्रों के लिए 22290 वर्ग मीटर (40X60) का आवासीय भूखण्ड दिया जाएगा । विस्थापित परिवारों एवं उनके बालिग पुत्रों को 502 वर्गमीटर का आवासीय भूखण्ड मुफ्त दिया जाएगा अथवा कोर मकान का निर्माण कराने के लिए वित्तीय सहायता के रूप में रू 45,000 क़ा भुगतान किया जाएगा । विस्थापित परिवारों एवं उनके बालिग पुत्रों तथा अविवाहित बालिग पुत्रियों को 502 वर्ग मीटर का मूल्य रहित आवासीय भूखण्ड दिया जाएगा।
5 - पुनर्वास अनुदान सहायता अनुदान पुनर्व्यवस्थापनपुनर्वास अनुदान की राशि प्रति परिवार 750 रू, ज़िसमें परिवहन व्यय भी सम्मिलित हैं, पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास सहायता अनुदान की राशि 500 रू तक निर्धारित । मध्य प्रदेश सरकार के 4 दिसम्बर, 2001 को पुनर्व्यवस्थापन एवं पुनर्वास नीति को और उदारीकृत किया है जिसके अनुसार नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड में दी गई व्यवस्था के अतिरिक्त ऊपर से और भी व्यवस्था की गई है । तदानुसार पुनर्वास के लिए किए गए सहायता अनुदान मापक्रम निम्नानुसार है : पुनर्वास अनुदान: सभी कृषि कार्यों में संलग्न भूमिहीन श्रमिकों अनुसूचित जातिअनसूचित जनजाति के श्रमिकों लघु एवं सीमान्त किसानों के प्रति किसान रू 18,700 एवं अन्य सभी श्रमिकों एवं भूमिहीन परिवारों को प्रति परिवार 9350 रू क़ी राशि । निर्वाह भत्ता पुनर्व्यवस्थापन के पश्चात प्रत्येक परिवार को एक वर्ष तक प्रत्येक माह 25 दिनों की भत्ता 15 रूपये प्रतिदिन की दर से निर्वाह भत्ते के रूप में भुगतान किए जाएंगे। पुनर्व्यवस्थापन अनुदान के रूप में प्रति परिवार 750 रू क़ी राशि, जो जनवरी, 1980 को आधार मानते हुए प्रतिवर्ष आठ प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ निकाली गई है, प्रदन की जाएगी । नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के निर्देशानुसार सहायता अनुदान के रूप में 500 रू क़ी राशि प्रदान की जाएगी। सभी वर्ग के विस्थापितों एवं उनके बालिग पुत्रों को उत्पादक सम्पत्तियाँ क्रय करने के लिए 7000 रू क़ी राशि । निर्वाह भत्ता पुनर्व्यवस्थापन के पश्चात प्रत्येक परिवार को एक वर्ष तक प्रत्येक माह 25 दिनों का भत्ता 15 रूपये प्रतिदिन की दर से निर्वाह भत्ते के रूप में भुगतान किए जाएंगे। पुनर्व्यवस्थापन अनुदान के रूप में प्रति परिवार 750 रू क़ी राशि, जो जनवरी, 1980 को आधार मानते हुए प्रतिवर्ष आठ प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ निकाली गई है, प्रदान की जाएगी । नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के निर्देशानुसार सहायता अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी । क्रम संख्या 2 में उल्लेखित किए गए उपर्युक्त लाभ सभी वर्ग के विस्थापितों एवं उनके बालिग पुत्रियों को उपलब्ध हो सकेंगे ।
6 - परिवहन वरिवहन व्यय का भुगतान पुनर्व्यवस्थापन पुनर्वास अनुदान के रूप में प्राप्त 750- रू क़ी राशि से किया जाएगा । परियोजना द्वारा मूल्य रहित परिवहन उपलब्ध कराया जाएगा । इस सुविधा का उपयोग न करने की स्थिति में परिवहन अनुदान के रूप में 5000 रू भुगतान किए जाएँगे । मूल्य रहित परिवहन की सुविधा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। मूल्य रहित परिवहन की सुविधा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
7 - निजी भूमि का अधिग्रहणऐसे गृह जो अलग- थलग पड़ गए हैं वास्तविक रूप से अलग हो गए हैं। कोई प्रावधान नहीं अधिग्रहण कर लिए जाएँगे एवं उनके स्वामी के प्रत्येक मामले की स्थिति-परिस्थिति के आधार पर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा लिए निर्णय के आधार पर ही विस्थापित के रूप में समझा जाएगा । अधिग्रहण कर लिए जाएँगे एवं उनके स्वामी को भी विस्थापित के रूप में समझा जाएगा । अधिग्रहण कर लिए जाएँगे एवं उनके स्वामी को भी विस्थापित के रूप में समझा जाएगा ।
8 - (अ) मुआवजा भूमि अधिग्रहण के समय परिचालित भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार । सन्निकट कमाण्ड क्षेत्र में इसी प्रकार की भूमि के मूल्य के आधार पर भूमि का मुआवजा । समय-समय पर संशोधित भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुरूप समय-समय पर संशोधित भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुरूप
(ब) घर भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार। घर की स्थानापन्न भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार ।
9 नगरिकीय सुविधाएँ

1 एक प्राथमिक विद्यालय (प्रत्येक 100 परिवार पर तीन कमरे)

2 एक पंचायत घर (प्रत्येक 500 परिवार पर)

3एक औषधालय (प्रत्येक 500 परिवार पर)

4 एक बीज भंडार (प्रत्येक 500 परिवार पर)

5 एक उद्यान (प्रत्येक 500 परिवार पर)

6 एक तालाब (प्रत्येक 500 परिवार पर)

7 नाली की सुविधाओं

1 पेय हेतु कुएँ नलकूप (निकास नालियों की

2संपर्क एवं पहुँच

3 बिजली

5.प्राथमिक विद्यालय

6 पंचायत भवन व सामुदायिक सभा भवन

7 क़्रीड़ा स्थल बाल उद्यान

8 पशु शेड

9 पूजा स्थल

10 ख़लिहान

11 बीज भण्डार

12 वृक्ष चबूतरा

13 श्मशान एवं कब्रिस्तान

14 तालाब (संभावित स्थानों पर)

15 प्रत्येक नागरीय शहर के लिए सामाजिक सुविधाएँ जैसे- जल आपूर्ति, स्वच्छता सम्बन्धी व्यवस्थाएँ इत्यादि ।

16 अन्य सुविधाएँ जैसे माध्यमिक स्कूल जो प्रभावित परिवार में पहले से अस्तित्व में थे तथा इसमें सुधार।

17 चारागृह के लिए जमीन का निर्धारण एवं उसमें सुधार ।

नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण अवार्ड के अनुरूप

1 एक प्राथमिक विद्यालय (3 कमरे 100 परिवारों पर)

2 एक पंचायत घर (500 परिवारों पर)

3 समाज के लिए मंदिर (सांस्कृतिक केन्द्र-500 परिवारों पर)

4 एक आरोग्य औषधालय (500 परिवारों पर)

5 एक बीज भंडार (500 परिवारों पर)

6 एक बाल उद्यान (500 परिवारों पर)

7 एक ग्राम्य तालाब (500 परिवारों पर) 8 पेयजल हेतु कुएँ, नाली की व्यवस्था के साथ (50 परिवारों पर)

9 पहुँच एवं आंतरिक सड़कें

10 एक वृक्ष चबूतरा (50 परिवारों पर)

11 विद्यालय क्रीडा स्थल (प्राथमिक विद्यालय हेतु एक एकड़ भूमि तथा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हेतु दो एकड़ क्षेत्र के क्रीड़ा स्थल)

12 विद्युत आपूर्ति

13 ख़ुला परनाला

14 सार्वजनिक शौचालय

15 पशुओं के एकत्रीकरण हेतु खुला स्थान

16 ख़लिहान

17 एसटी स्टैंड

18 चारागाह

19 हाट हेतु खुला स्थान

20श्मशान कब्रिस्तान

10. अन्य सुविधाएँ कुछ प्रावधान नहीं किया गया है

1 परियोजना से प्रभावित ऐसे परिवार जिन्होंने राज्य से ब्याज रहित ऋण प्राप्त करने का लाभ प्राप्त नहीं किया, उन्हें दो वर्षों तक 1,000 रू प्रति हेक्टेयर भूमि के हिसाब से सहायता अनुदान के रूप में धनराशि दी जाएगी।

2 'ग़' वर्ग की शासकीय नौकरियों के अन्तर्गत आयु सीमा में दो वर्ष की छूट ।

3 विस्थापित स्थलों में पूर्व से चली आ रही उन सभी कल्याणकारी

1 ड़ूंगरी भलों को उनकी वैवाहिक परिधियों में बसाने के लिए विशेष योजनाएँ

2 तालाब जल के आवंटन में प्राथमिकता

3 एेसे परिवार जो कृषि कार्यों में संलग्न नहीं हैं जैसे व्यवसायी, दुकानदार, कलाकार आदि, इन्हें नए पुनर्वास स्थलों में बसने पर आर्थिक सहायता के रूप में 5,000 रू क़ी राशि दी जाती है तथा नए पुनर्वास स्थल में अपना व्यवसाय प्रारम्भ करने हेतु उन्हें उतने क्षेत्रफल का स्थान उपलब्ध कराया गया है, जितना उनके पास विस्थापन होने से पूर्व उपलब्ध था एवं इसके मूल्य के अन्तर को अनुग्रह राशि के रूप में मान लिया जाएगा । रोजगार में प्राथमिकता

4 पूर्व में चली आ रही अभी कल्याणकारी योजनाओं को पुनर्वास स्थलों पर भी चलाया जाएगा ।

पुनर्वास हुए परिवार के सदस्यों को आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देते हुए सार्वजनिक रोजगारों में प्राथमिकता देने, बशर्तें वे उस पद की अपेक्षित, न्यूनतम योग्यताएँ पूर्ण करते हों, इस बात का प्रयास किया जाएगा कि परियोजना कार्यों में अधिक से अधिक विस्थापितों को ही रखा जाए । 1-

'ग' एवं 'घ' वर्ग के पदों में प्राथमिकता देना । परियोजना संस्थापन कार्यों में आरक्षण की व्यवस्था ।

2- औद्योगिक तकनीकी संस्थान में 50 प्रतिशत आरक्षण ।

3- परियोजना से प्रभावित

4- बच्चों को सभी शासकीय अर्धशासकीय संस्थाओं तथा स्थानीय प्राधिकरण की वर्ग 'ग' एवं 'घ' पदों पर पाँच प्रतिशत आरक्षण

5- गृह निर्माण अग्रिम

1- भूधारक को 8000 रू तक

2- भूमिहीन श्रमिकों को 4000 रू तक 5 राज्य की विद्यमान नीति के अनुसार तालाब आधार भूमि के आवंटन में प्राथमिकता ।

6 पूर्व से चली आ रही सभी कल्याणकारी योजनाओं को पुनर्वास स्थलों पर भी चलाया जाएगा।

 
 
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